घटते पेड़ों की संख्या, गरूड़ के अस्तित्व के लिए खतरा

WhatsApp Channel Join Now
घटते पेड़ों की संख्या, गरूड़ के अस्तित्व के लिए खतरा


घटते पेड़ों की संख्या, गरूड़ के अस्तित्व के लिए खतरा


भागलपुर, 25 मार्च (हि.स.)। नवगछिया का कदवा दियारा बड़े गरुड़ जैसे विलुप्तप्राय पक्षी का प्रजनन क्षेत्र संरक्षण के लिए बेहद महत्वपूर्ण स्थल है। लेकिन यहाँ घोंसलों के लिए पेड़ों की कमी, चिंता का विषय बनती जा रही है।

घटते पेड़ों की संख्या विलुप्तप्राय गरूड़ के अस्तित्व के लिए खतरा साबित हो रहा है। पर्यावरण और पक्षीविद दीपक कुमार उर्फ झुन्नू का कहना है कि पक्षीविदों और स्थानीय लोगों को मिलकर इस दिशा में ईमानदारी से काम करने की जरूरत है। सबसे पहले, क्षेत्र में घटते पेड़ों की जगह देशी प्रजाति के घोंसले के लिए उपयुक्त पेड़ों का पुनर्रोपण होना नितांत आवश्यक है, ताकि पक्षियों को सुरक्षित घोंसला बनाने का स्थान फिर से मिल सके।

पुराने और बड़े पेड़ों को काटने से रोकने के लिए जागरूकता फैलाना भी बहुत जरूरी है। स्थानीय समुदाय की भागीदारी हो, इसके लिए इमानदार प्रयास अत्यंत आवश्यक है। तभी इस प्राकृतिक धरोहर को बचाया जा सकता है। छोटे-छोटे प्रयास मिलकर इस अनमोल प्रजाति के संरक्षण में बड़ा योगदान दे सकते हैं।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

Share this story