मछुआ वैकल्पिक रोजगार प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित, महिलाओं ने सीखे मछली के अचार और कटलेट बनाने के गुर

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मछुआ वैकल्पिक रोजगार प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित, महिलाओं ने सीखे मछली के अचार और कटलेट बनाने के गुर


भागलपुर, 06 सितंबर (हि.स.)। जिले के कहलगांव कुआं पुल के नजदीक स्थित मंडपम में रविवार को परिधि संस्था द्वारा 'मछुआ वैकल्पिक रोजगार प्रशिक्षण कार्यशाला' का आयोजन किया गया। गंगा मुक्ति आंदोलन के समर्थन से आयोजित इस कार्यशाला में क्षेत्र के लगभग 50 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें महिलाओं की संख्या सर्वाधिक (करीब 40) रही। कार्यशाला की शुरुआत करते हुए परिधि के निदेशक उदय ने कहा कि आज बिहार मत्स्य उत्पादन के मामले में देश में चौथे स्थान पर पहुंच चुका है। हालांकि, नदियों पर निर्भर मछुआरों को अपनी मछलियां औने-पौने दामों पर बेचनी पड़ती हैं। अगर मछुआरे मछली के अन्य मूल्यवर्धित उत्पाद बनाना शुरू करें, तो उनका मुनाफा काफी बढ़ सकता है।

कार्यक्रम समन्वयक राहुल ने भी पारंपरिक तरीकों से बाहर निकलकर सोच में बदलाव लाने की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं, जमीनी कार्यकर्ता और वार्ड पार्षद योगेंद्र सहनी ने कहा कि परिधि संस्था मछुआ समुदाय के सर्वांगीण विकास और आजीविका की सुरक्षा के लिए लगातार प्रयासरत है। वैकल्पिक रोजगार के इस प्रशिक्षण सत्र में 'जल जीविका' से आए विशेषज्ञ फैसिलिटेटर वर्तिका और ब्रजेश ने प्रतिभागियों को मछली से कटलेट, समोसा और अचार बनाने की विधि सिखाई। अचार बनाने के लिए महिलाओं को मछली काटने, उसे फ्राई करने और मसाला तैयार करने का लाइव डेमोंस्ट्रेशन दिया गया। इसके बाद महिलाओं ने सहभागी पद्धति से खुद अचार तैयार किया। चूल्हा, गैस, बर्तन और मसालों का उपयोग कर पहली बार इस तरह का उत्पाद तैयार करना प्रतिभागियों के लिए एक बेहद सुखद और नया अनुभव था।

इस दौरान प्रशिक्षित मत्स्य पालक कुंज बिहारी ने भी उपस्थित लोगों के साथ अपने अनुभव साझा किए। डिजिटल माध्यमों, पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन और वीडियो के जरिए भी प्रशिक्षण को आसान बनाया गया। इस अनूठे प्रशिक्षण को लेकर युवा लड़कियों और महिलाओं में भारी उत्साह देखा गया। कार्यशाला में शामिल आयुक्ता, मुस्कान, रानी, स्वीटी, रेखा और प्रीति आदि ने बताया कि वे अब अपने घरों में खाने के साथ-साथ व्यावसायिक रूप से बेचने के लिए भी मछली का अचार बनाना शुरू करेंगी। उन्होंने खुशी जताते हुए कहा कि गंगा मुक्ति आंदोलन की आगामी वर्षगांठ पर जब सभी साथी जुटेंगे, तो वे उन्हें अपने हाथ से बना मछली का अचार खिलाएंगी और वहां इसकी प्रदर्शनी भी लगाएंगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

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