आठ दिवसीय कार्यशाला संपन्न

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आठ दिवसीय कार्यशाला संपन्न


भागलपुर, 08 अगस्त (हि.स.)। राष्ट्रीय अनुवाद मिशन, भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर द्वारा विश्वविद्यालय मनोविज्ञान विभाग, तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर के सहयोग से आयोजित 8 दिवसीय कार्यशाला शनिवार को समाप्त हुई।

कार्यशाला के समापन सत्र में प्रोफेसर लक्ष्मी पाण्डेय, विभागाध्यक्षा सह कॉर्डिनेटर एवं विषय विशेषज्ञ ने सभी अतिथियों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए कहा कि यह कार्यशाला केवल अनुवाद तक सीमित नहीं रही बल्कि ज्ञान-विनिमय, शैक्षणिक संवाद, भाषयी समृद्धि एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण का एक सशक्त मंच सिद्ध हुआ। कार्यक्रम के संरक्षक प्रोफेसर रामाशीष पूर्वे, संकायाध्यक्ष, वाणिज्य एवं कुलसचिव, तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर ने कहा कि यह कार्यशाला भविष्य के अनुवाद एवं अनुसंधान कार्यों के लिए प्रेरणा-स्रोत बनेंगे।

उन्होंने सभी विषय विशेषज्ञों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी ने 8 दिनों तक अत्यंत गंभीरता, समर्पण एवं विद्वता के साथ कार्य किया है। राष्ट्रीय अनुवाद मिशन, भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर के कॉर्डिनेटर सह विषय विशेषज्ञ डॉक्टर शंभू कुमार सिंह ने कहा कि सभी विषय विशेषज्ञ दीर्घ शैक्षणिक अनुभव और उत्कृष्ट विद्वता वाले थे, जिनके वर्षों के अध्यापन, अनुसंधान और अनुवाद के अनुभव ने इस कार्यशाला की गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनके गहन विषय-ज्ञान, सूक्ष्म विश्लेषण तथा रचनात्मक सुझावों ने 'द इकोनामिक हेरीटेज आफ मिथिला' के मैथिली अनुवाद को 'मिथिलाक आर्थिक विरासत' के रूप में सामने लाया।

विषय विशेषज्ञ एवं पुस्तक के लेखक डॉक्टर शैलेंद्र कुमार झा ने कहा कि मैथिली अनूदित पुस्तक भी मूल पुस्तक के समान ही है। अर्थात इसकी मौलिकता परिवर्तित नहीं हुई है। इसके अतिरिक्त इस कार्यशाला के विषय विशेषज्ञों में प्रोफेसर रंजीत कुमार सिंह, पूर्व विभागाध्यक्ष, मैथिली विभाग बीएनएमयू, मधेपुरा, प्रोफेसर प्रमोद कुमार पाण्डेय, पूर्व विभागाध्यक्ष एवं संकायाध्यक्ष, मानविकी, तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर एवं प्रोफेसर कृष्ण कुमार मंडल, विभागाध्यक्ष, प्राचीन इतिहास विभाग, तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर भी शामिल थे।

सभी विषय विशेषज्ञों ने सामूहिक रूप से 'द इकोनामिक हेरिटेज आफ मिथिला' के मैथिली अनूदित पुस्तक 'मिथिलाक आर्थिक विरासत' को राष्ट्रीय अनुवाद मिशन, भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर के संयोजक डॉक्टर शंभू कुमार सिंह को समर्पित किया। डॉ. शंभू कुमार सिंह ने कहा कि लगभग एक महीने में यह पुस्तक प्रकाशित हो जाएगी। फिर भारतीय भाषा संस्थान के वेबसाइट पर यह पुस्तक दिखेगी एवं कोई भी इसे खरीद सकते हैं।

समापन सत्र में विश्वविद्यालय मनोविज्ञान विभाग, तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर के सभी शिक्षक डॉक्टर सपना, डॉक्टर चंदा कुमारी, विवेकानंद कुमार, डॉ कुमारी आरती, सभी शिक्षकेत्तर कर्मचारी एवं छात्र -छात्राएं उपस्थित थे।

हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

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