शहर से गांव तक फैलता ‘सूखा नशा’: युवा पीढ़ी पर बड़ा खतरा  

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सुपौल, 26 अप्रैल (हि.स.)। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक ‘सूखे नशे’ का कारोबार तेजी से फैलता जा रहा है, जो समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। स्मैक जैसे खतरनाक नशे की गिरफ्त में अब बड़ी संख्या में युवा और किशोर वर्ग आ रहे हैं। हालात यह हैं कि पढ़ाई-लिखाई की उम्र में बच्चे नशे के आदी होते जा रहे हैं, जिससे उनके भविष्य पर गहरा असर पड़ रहा है। पुलिस द्वारा लगातार कार्रवाई करते हुए कई तस्करों और धंधेबाजों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है, इसके बावजूद इस अवैध कारोबार पर पूरी तरह रोक नहीं लग पा रही है। नशे के नेटवर्क की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि एक गिरोह के पकड़े जाने के बाद दूसरा सक्रिय हो जाता है।स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर सख्ती नहीं की गई, तो आने वाले समय में स्थिति और भयावह हो सकती है। समाज के हर वर्ग द्वारा प्रशासन से कड़े कदम उठाने की मांग की जा रही है, ताकि युवाओं को इस दलदल से बचाया जा सके।सूखे नशे का असर केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सड़क सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बनता जा रहा है। नशे की हालत में वाहन चलाने के कारण दुर्घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। खासकर युवा बाइक चालक इसकी चपेट में आकर अपनी जान गंवा रहे हैं, जिससे परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या से निपटने के लिए केवल पुलिस कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज, परिवार और शैक्षणिक संस्थानों को भी मिलकर जागरूकता फैलानी होगी। स्कूल और कॉलेज स्तर पर नशा विरोधी अभियान चलाकर युवाओं को इसके दुष्परिणामों के बारे में बताना बेहद जरूरी है। समय की मांग है कि प्रशासन कड़ी निगरानी और सख्त कानूनों के साथ इस कारोबार की जड़ तक पहुंचे, वहीं समाज भी जागरूक होकर नशे के खिलाफ एकजुट हो। तभी इस बढ़ते खतरे पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा

सकता है।

हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र

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