मानकों को ताक पर रख घुटने भर पानी में ढल रहा नाला, आक्रोशित लोगों ने काम कराया बंद
भागलपुर, 28 अगस्त (हि.स.)। भागलपुर नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नंबर चार स्थित नाथनगर अनाथालय रोड में बन रहे मुख्य नाले के निर्माण में बड़ी गड़बड़ी का मामला सामने आया है। ठेकेदार द्वारा मानकों को ताक पर रखकर कराए जा रहे घटिया निर्माण से नाराज स्थानीय लोगों ने मौके पर पहुंचकर काम को पूरी तरह बंद करा दिया।
लोगों का आरोप है कि करीब 30 लाख रुपये की लागत वाली इस योजना में भारी अनियमितता बरती जा रही है। स्थानीय निवासियों ने बताया कि नाले की खुदाई के बाद उसमें बारिश का पानी लबालब भरा हुआ था। नियम के मुताबिक, पानी को मोटर या अन्य संसाधनों से बाहर निकालने के बाद ही ढलाई या लेवलिंग का काम शुरू होना चाहिए था। लेकिन ठेकेदार के कर्मियों ने पानी निकाले बिना ही उसमें सीधे सीमेंट, बालू और छर्री से बना मसाला (कंक्रीट) डालना शुरू कर दिया।
इस धांधली का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि मजदूर घुटने भर पानी के बीच ही कंक्रीट का मसाला डाल रहे हैं, जिससे सीमेंट पानी में बह जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। जब लोगों ने मौके पर मौजूद मुंशी से निर्माण कार्य का एस्टीमेट (प्राक्कलन) दिखाने को कहा, तो उसने साफ इनकार कर दिया।
इसके बाद लोग आक्रोशित हो गए और हंगामा करते हुए काम रुकवा दिया। स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने इस मामले में मेयर डॉ. वसुंधरा लाल से उच्च स्तरीय जांच और दोषी ठेकेदार पर कार्रवाई की मांग की है। काम बंद होने और हंगामे की सूचना मिलते ही वार्ड पार्षद मनीष यादव तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने आक्रोशित लोगों को समझा-बुझाकर शांत कराया। पार्षद मनीष यादव ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में कनीय अभियंता से बात की है। निर्माण कार्य में जो भी गड़बड़ी पाई जाएगी, उसे हर हाल में दुरुस्त कराया जाएगा। उन्होंने स्थानीय लोगों को भरोसा दिलाया कि गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा।
मामला तूल पकड़ते देख नगर निगम के अधिकारी भी आनन-फानन में मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने निर्माण स्थल का जायजा लिया और ठेकेदार और विभागीय कर्मियों को सख्त लहजे में हिदायत दी कि एस्टीमेट और मानकों के अनुरूप ही गुणवत्तापूर्ण काम कराया जाए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कमोबेश यही स्थिति इस समय पूरे भागलपुर शहर में बन रहे नालों की है। हर जगह संवेदक अपनी मनमानी कर रहे हैं, जिससे सरकारी राशि का बंदरबांट हो रहा है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि संबंधित इंजीनियर और नगर निगम का तकनीकी विभाग इस पूरी लापरवाही पर मौन साधे बैठा है, जिससे उनकी कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

