कटिहार-जोगबनी रेलखंड के दोहरीकरण को मिली मंजूरी
अररिया 21 फरवरी(हि.स.)। सामरिक और आर्थिक रूप से अति महत्वपूर्ण कटिहार-जोगबनी रेलखंड पर यात्री एवं माल ढुलाई ट्रेनों के बढ़ते दबाव को लेकर पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के 108 किमी लंबे कटिहार-जोगबनी रेलखंड के दोहरीकरण की मंजूरी दे दी है।
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के 108 किलोमीटर लंबे जोगबनी कटिहार-जोगबनी रेलखंड के अंतर्गत दोहरीकरण की परियोजना को रेल मंत्रालय द्वारा स्वीकृति प्रदान कर दी गई है,जिसके निर्माण के पूरे हो जाने के बाद इस रेलखंड में ट्रेनों के आवाजाही निर्वाध गति से होगी। इस महत्वपूर्ण परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 1799.82 करोड रुपए है जिसे पूरा करने का लक्ष्य 4 वर्षों में रखा गया है।
उल्लेखनीय है कि यह रेलखंड 1909 से ही सिंगल लाइन का है तथा ट्रेनों के परिचालन बढ़ जाने की वजह से विपरीत दिशा से आने वाली ट्रेनों को क्रॉसिंग के लिए विभिन्न स्टेशनों पर लंबा इंतजार करना पड़ता है, जिससे यात्रा समय बढ़ने के साथ-साथ यात्रियों को दुश्वारीयों का भी सामना करना पड़ता है ।
दोहरीकरण हो जाने के बाद इस रेलवेखंड के 19 स्टेशन को तेज कनेक्टिविटी मिलेगी जहां विपरीत दिशाओं से आने वाली ट्रेने एक दूसरे को क्रॉस किये बिना निर्बाध गति से चल सकेंगी, जिससे समय पालन में सुधार के साथ-साथ ट्रेनो की औसत गति भी बढ़ जाएगी और यातायात क्षमता में कई गुना वृद्धि होगी।
दोहरीकरण के इस परियोजना को लेकर सरकार ने वर्तमान रेल लाइन के अगल-बगल की जमीन की खरीद बिक्री पर रोक भी लगा दी है ।
कटिहार रेलवे परामर्शदात्री समिति के सदस्य सह विहार डेली पैसेंजर्स एसोसिएशन की केंद्रीय समिति के सदस्य बछराज राखेचा ने इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दिए जाने हेतु रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति आभार जताते हुए कहा है कि इस परियोजना से कटिहार, पूर्णिया, अररिया, फारबिसगंज और सीमांचल क्षेत्र के साथ-साथ पूर्वी नेपाल की सीमा से लगे इलाकों को बहुत फायदा होगा। यात्रियों को सुगम परिवहन के साथ-साथ ट्रेनो की तेज रफ्तार का फायदा तो मिलेगा ही, बहुत सारी नई ट्रेनों के परिचालन का रास्ता भी प्रशस्त हो जाएगा जिससे व्यापार, पर्यटन, रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
इस संदर्भ में इंडो नेपाल रेल यूजर्स ऑर्गेनाइजेशन के सदस्य एवं पूर्व मध्य रेलवे की रेल परामर्शदात्री समिति के सदस्य विनोद सरावगी ने इस परियोजना की मंजूरी का स्वागत करते हुए कहा की इसी रेल के अंतर्गत 129 किलोमीटर लंबे फारबिसगंज - सकरी रेल लाइन के भी दोहरीकरण हेतु फाइनल लोकेशन सर्वे किए जाने 3 करोड़ 9 लाख की राशी स्वीकृत होने की जानकारी दी।
उन्होंने सांसद प्रदीप कुमार सिंह से फारबिसगंज से लक्ष्मीपुर के 17.60 किलोमीटर लंबे नई रेल लाइन के निर्माण हेतु पहल करने को कहा है जिसका फाइनल लोकेशन सर्वे पूरा हो चुका है। सीमांचल और मिथिलांचल के पूरे क्षेत्र में रेल लाइन्स के दोहरीकरण हो जाने वाली के बाद दशकों से उपेक्षित पूरे सीमांचल मे रेल सेवाओं में एक अद्भुत क्रांति आएगी और इन सभी प्रस्तावित परियोजनाओं में चार चांद लग जाएंगे।
हिन्दुस्थान समाचार / राहुल कुमार ठाकुर

