मानवता की मिसाल: गुरुदेव मुखिया का जीएमसीएच पूर्णिया में सफल ऑपरेशन

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मानवता की मिसाल: गुरुदेव मुखिया का जीएमसीएच पूर्णिया में सफल ऑपरेशन


मानवता की मिसाल: गुरुदेव मुखिया का जीएमसीएच पूर्णिया में सफल ऑपरेशन


मानवता की मिसाल: गुरुदेव मुखिया का जीएमसीएच पूर्णिया में सफल ऑपरेशन


पूर्णियां, 17 अप्रैल (हि.स.)। बिहार में पूर्णिया जिले के भवानीपुर निवासी गुरुदेव मुखिया, पिता रंगु मुखिया, जो आर्थिक रूप से अत्यंत कमजोर हैं, उनका जीएमसीएच पूर्णिया में सफल ऑपरेशन किया गया। डॉ. तारकेश्वर कुमार और डॉ. विकास कुमार के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम ने इस जटिल ऑपरेशन को अंजाम दिया। डॉक्टरों ने बताया कि अगले 24 घंटे बेहद महत्वपूर्ण हैं, लेकिन पूरी उम्मीद है कि मरीज जल्द स्वस्थ होकर सामान्य जीवन में लौटेंगे।

गुरुदेव मुखिया की पीड़ा की कहानी बेहद मार्मिक है। लगभग 30 वर्ष पूर्व उनके गले में एक छोटा सा मस्सा हुआ था, जिसे उन्होंने होम्योपैथी दवाओं से ठीक करने का प्रयास किया, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वे बड़े अस्पतालों तक नहीं पहुंच सके। धीरे-धीरे यह मस्सा बढ़कर मांस के भारी लोथड़े में बदल गया, जिसका वजन करीब 3 किलो तक हो गया था। यह गले के नीचे कटहल की तरह लटकता रहता था, जिससे उन्हें न केवल शारीरिक कष्ट होता था, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी भी बेहद कठिन हो गई थी। बावजूद इसके वे मजदूरी कर किसी तरह अपना जीवन यापन करते रहे।

डॉ. विकास कुमार की नजर उन पर उस समय पड़ी जब वे एक होटल में बड़ी मुश्किल से भोजन कर रहे थे। स्थिति देखकर डॉक्टरों का हृदय द्रवित हो गया और उन्होंने तत्काल उन्हें जीएमसीएच लाने का निर्णय लिया। मरीज के पास इलाज कराने की कोई आर्थिक क्षमता नहीं थी, लेकिन डॉक्टरों ने मानवता का परिचय देते हुए बिना एक भी पैसा लिए इलाज का संकल्प लिया। मरीज के साथ कोई अभिभावक नहीं होने के कारण प्रेस क्लब पूर्णिया, श्रीराम सेवा संघ एवं अन्य सामाजिक संस्थाओं को जोड़ा गया, जिन्होंने हर स्तर पर सहयोग दिया।

श्रीराम सेवा संघ की ओर से पवन झा को केयरटेकर बनाया गया, जिन्होंने अपनी निजी कठिनाइयों के बावजूद सेवा का दायित्व निभाने का संकल्प लिया। वहीं जीएमसीएच के मेडिकल छात्र-छात्राओं ने भी गुरुदेव मुखिया को अपने पिता समान मानकर सेवा करने की बात कही। यह दृश्य न केवल संवेदनशीलता का उदाहरण है, बल्कि समाज में मानवीय मूल्यों की जीवंत तस्वीर भी प्रस्तुत करता है।

डॉक्टरों की इस टीम की विशेषता यह है कि इन्होंने अब तक सैकड़ों गरीब और असहाय लोगों का बिना आर्थिक बोझ डाले इलाज किया है, जिससे कई परिवारों को जमीन-जायदाद बेचने जैसी मजबूरी से बचाया गया है। एक ओर जहां कुछ फर्जी नर्सिंग होम और दलालों के माध्यम से मरीजों का शोषण कर उन्हें आर्थिक रूप से तोड़ा जाता है, वहीं दूसरी ओर पूर्णिया के ये युवा डॉक्टर अपने कर्म से यह साबित कर रहे हैं कि चिकित्सा केवल पेशा नहीं, बल्कि सेवा और मानवता का सबसे बड़ा धर्म है।

डॉ. तारकेश्वर कुमार और डॉ. विकास कुमार ने कहा कि यदि डॉक्टर केवल पैसे पर ध्यान केंद्रित करेंगे तो मानव कल्याण संभव नहीं है। ईश्वर ने जो क्षमता दी है, उसका उपयोग गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा में करना ही सच्ची चिकित्सा है। जीएमसीएच पूर्णिया की इस पहल ने पूरे क्षेत्र में एक सकारात्मक संदेश दिया है और डॉक्टरों के प्रति समाज का विश्वास और सम्मान और मजबूत किया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / नंदकिशोर सिंह

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