185 वर्ष पुरानी रामचरितमानस की पांडुलिपि साझा करने पर डीएम ने किया सम्मानित

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185 वर्ष पुरानी रामचरितमानस की पांडुलिपि साझा करने पर डीएम ने किया सम्मानित


सीवान, 08 जून (हि.स.)। केंद्र सरकार के ज्ञान भारतम् अभियान के तहत जिले में सांस्कृतिक विरासत संरक्षण की दिशा में सोमवार को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई।

भगवानपुर हाट प्रखंड के पिपरहिया गांव निवासी डॉ. विधुशेखर पांडेय को 185 वर्ष पुरानी तुलसीकृत श्रीरामचरितमानस की हस्तलिखित पांडुलिपि को सुरक्षित रखने एवं जिला प्रशासन से साझा करने के लिए जिला पदाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय ने सम्मानित किया। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक पूरन कुमार झा, उप विकास आयुक्त मुकेश कुमार, जिला पंचायत राज पदाधिकारी बालेंदु नारायण पांडेय तथा जिला परिवहन पदाधिकारी अमर ज्योति भी उपस्थित रहे।

जानकारी के अनुसार यह दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपि वर्ष 1840 में स्वर्गीय पंडित रघुवर पांडेय द्वारा लिखी गई थी। पंडित रघुवर पांडेय अपने समय के प्रसिद्ध ज्योतिर्विद एवं तंत्र विज्ञानी थे तथा मांझा गढ़ राज के राजपुरोहित भी रहे थे। उनके परिवार ने इस अमूल्य धरोहर को लगभग 185 वर्षों तक सुरक्षित रखा है। यह पांडुलिपि उस दौर की बौद्धिक एवं सांस्कृतिक चेतना का महत्वपूर्ण दस्तावेज मानी जा रही है। पांडुलिपि खोज अभियान के दौरान डॉ. विधुशेखर पांडेय, अमिताभ पांडेय एवं डॉ. रामशरण पांडेय ने अपने घर में संरक्षित इस दुर्लभ पांडुलिपि की जानकारी ज्ञान भारतम् टीम के सदस्यों गणेश दत्त पाठक एवं आशुतोष नंदन को दी। टीम द्वारा पांडुलिपि का अवलोकन करने के बाद इसकी सूचना जिला प्रशासन को दी गई।

जिलाधिकारी सहित अन्य वरीय अधिकारियों ने पांडुलिपि का अवलोकन करते हुए परिवार की सराहना की। डीएम ने कहा कि इस प्रकार की पांडुलिपियां हमारी सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर हैं। इन्हें सुरक्षित रखने और प्रशासन से साझा करने के लिए परिवार धन्यवाद का पात्र है। उन्होंने जिलेवासियों से अपील की कि यदि उनके पास 75 वर्ष या उससे अधिक पुरानी पांडुलिपियां उपलब्ध हैं तो वे उन्हें जिला प्रशासन से साझा करें।डीएम ने स्पष्ट किया कि प्रशासन केवल पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण कर उन्हें सुरक्षित संरक्षित करेगा तथा मूल पांडुलिपि संबंधित परिवार को वापस कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों से सिवान के सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक शोध को नई दिशा मिलेगी।

हिन्दुस्थान समाचार / Amar Nath Sharma

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