डीएम ने मछुआरों के बीच बांटे आधुनिक किट और संसाधन

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डीएम ने मछुआरों के बीच बांटे आधुनिक किट और संसाधन


भागलपुर, 12 मई (हि.स.)। अब मछली पालन सिर्फ परंपरागत रोजगार नहीं बल्कि आत्मनिर्भरता और आर्थिक विकास का नया मॉडल बनता जा रहा है।

जिले को मछली उत्पादन के क्षेत्र में मजबूत पहचान दिलाने की दिशा में जिला प्रशासन लगातार काम कर रहा है। इसी कड़ी में भागलपुर के समीक्षा भवन में मंगलवार को मुख्यमंत्री मत्स्य विपणन योजना के तहत एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। जहां जिलाधिकारी डॉ नवल किशोर चौधरी ने 121 लाभार्थियों के बीच आधुनिक किट और संसाधनों का वितरण किया। कार्यक्रम में मछुआरों को बड़ी हांडी, वेइंग मशीन, जाल, छोटे फ्रीजर और अन्य आवश्यक उपकरण दिए गए। डीएम ने कहा कि पहले मछुआरों को संरक्षण की कमी के कारण कम दामों में मछलियां बेचनी पड़ती थीं। लेकिन अब फ्रीजर मिलने से मछलियां सुरक्षित रहेंगी और उन्हें बेहतर बाजार मूल्य मिलेगा।

इसके साथ ही अधिक उत्पादन करने वाले मछुआरों को ऑटो भी दिए गए हैं, ताकि वे सीधे बाजार तक मछलियां पहुंचा सकें। नदियों में काम करने वाले मछुआरों की सुरक्षा के लिए लाइफ जैकेट और नाव खरीदने के लिए सब्सिडी की व्यवस्था भी की गई है। डीएम ने बताया कि बिहपुर में लगभग 50 लाख रुपये की लागत से आधुनिक हैचरी प्लांट विकसित किया गया है। जहां उच्च गुणवत्ता वाले मछली बीज तैयार किए जा रहे हैं। इससे अब भागलपुर को मछली बीज के लिए आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। डीएम ने कहा कि जिले में नए तालाबों का निर्माण कराया जा रहा है और मछुआरों को वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन की ट्रेनिंग भी दी जा रही है। प्रशासन का लक्ष्य भागलपुर को सिल्क सिटी के साथ-साथ बिहार के प्रमुख मछली उत्पादन केंद्र के रूप में स्थापित करना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

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