शिवभक्ति के साथ दिखेगा राष्ट्रभक्ति का रंग, भागलपुर से 14 अगस्त को निकलेगी भव्य तिरंगा कांवड़ यात्रा
भागलपुर, 13 अगस्त (हि.स.)। सावन के पावन महीने में रेशमी नगरी भागलपुर में धार्मिक आस्था और देशभक्ति का एक बेहद अनोखा संगम देखने को मिलेगा। आगामी 14 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर 'भक्त याराना मंडल' की ओर से बाबा बासुकीनाथ धाम के लिए एक भव्य तिरंगा कांवड़ यात्रा निकाली जाएगी। यात्रा की तैयारियों को लेकर आयोजित एक प्रेस वार्ता में संस्था के मोंटी जोशी और अन्य पदाधिकारियों ने इसकी विस्तृत रूपरेखा और उद्देश्यों को साझा किया। संस्था के महंत अमित कनोडिया, उप महंत विष्णु वर्मा और संरक्षक अश्वनी जोशी (मोंटी) ने संयुक्त रूप से बताया कि वर्ष 2011 से ही भक्त याराना मंडल इस कांवड़ यात्रा का आयोजन करता आ रहा है।
इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ-साथ समाज में सामाजिक समरसता, स्वच्छता और देशभक्ति का संदेश फैलाना है। इसी सोच के तहत शिव भक्ति के साथ राष्ट्रभक्ति को जोड़ते हुए इसे 'तिरंगा कांवड़ यात्रा' का स्वरूप दिया गया है। पदाधिकारियों ने बताया कि 14 अगस्त की सुबह सुल्तानगंज स्थित उत्तरवाहिनी गंगा से पवित्र गंगाजल भरकर इस यात्रा की शुरुआत होगी। इसके बाद सभी कांवड़िए खरमनचक स्थित गोकुल धाम पहुंचेंगे। गोकुल धाम में शाम के समय बाबा बासुकीनाथ की एक भव्य महाआरती का आयोजन किया जाएगा। महाआरती संपन्न होने के बाद ढोल-नगाड़े, भजन मंडली और बाबा बासुकीनाथ की मनमोहक झांकी के साथ 108 कांवड़िए पैदल ही बासुकीनाथ धाम के लिए प्रस्थान करेंगे। देशभक्ति के जज्बे से सराबोर इस यात्रा के दौरान 15 अगस्त को कांवड़ियों का पड़ाव जहाँ कहीं भी होगा, वहाँ पूरे सत्कार के साथ ध्वजारोहण किया जाएगा और राष्ट्रगान गाकर स्वतंत्रता दिवस मनाया जाएगा। इसके अलावा सामाजिक सरोकार निभाते हुए यात्रा के मार्ग में आने वाली स्लम बस्तियों (मलिन बस्तियों) में सहभोज (सामूहिक भोज) का आयोजन होगा और स्वच्छता अभियान भी चलाया जाएगा।
कांवड़ियों की सुरक्षा और सेवा के लिए संस्था के 151 सदस्यों की एक विशेष टीम पूरे रास्ते मुस्तैद रहेगी। प्रेस वार्ता के दौरान संस्था ने सरकार और स्थानीय प्रशासन से एक महत्वपूर्ण मांग भी की है। संस्था के पदाधिकारियों का कहना है कि भागलपुर से बासुकीनाथ धाम तक कांवड़ियों के चलने के लिए एक अलग कच्चे मार्ग (बालू या मिट्टी वाले रास्ते) का निर्माण किया जाना बेहद जरूरी है। वर्तमान में पक्की और कंकरीली सड़कों पर नंगे पैर लंबी दूरी तय करने के कारण कांवड़ियों को अत्यधिक शारीरिक परेशानियों और छालों का सामना करना पड़ता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

