आषाढ़ी गुप्त नवरात्रि का हुआ विसर्जन, महाकाल मंदिर में मां कमला की विशेष पूजा
किशनगंज, 24 जुलाई (हि.स.)। आषाढ़ी गुप्त नवरात्रि के समापन अवसर पर शुक्रवार को शहर के रुईधासा स्थित महाकाल मंदिर में माता जगदंबा एवं बाबा महाकाल की विशेष पूजा-अर्चना के साथ गुप्त नवरात्रि का विधिवत विसर्जन किया गया।
इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना में भाग लेकर परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य एवं शांति की कामना की। गुप्त नवरात्रि के दसवें एवं अंतिम दिन मां दुर्गा के दसवें स्वरूप मां कमला की वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विशेष पूजा संपन्न हुई।
सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर के पुरोहित गुरु साकेत के सानिध्य में दुर्गा सप्तशती का पाठ, भगवान महाकाल का जलाभिषेक, हवन तथा अन्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए गए।
जय माता दी और जय महाकाल के जयघोष से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा। गुरु साकेत ने बताया कि वर्ष में चार बार नवरात्रि मनाई जाती है, जिनमें आषाढ़ और माघ की गुप्त नवरात्रि का विशेष आध्यात्मिक एवं तांत्रिक महत्व है।
उन्होंने कहा कि गुप्त नवरात्रि शक्ति उपासना, तंत्र साधना और दस महाविद्याओं की आराधना का श्रेष्ठ काल माना जाता है।अंतिम दिन मां कमला की साधना का विशेष महत्व है, जिन्हें धन, ऐश्वर्य, सौभाग्य, समृद्धि और सुख-शांति की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है।
उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां कमला, देवी लक्ष्मी का ही स्वरूप हैं। सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ उनकी आराधना करने से आर्थिक संकट दूर होते हैं तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। मां कमला की पूजा प्रदोष काल अथवा रात्रि में करना विशेष शुभ माना गया है।
मंदिर परिसर में महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर मां भगवती का आशीर्वाद प्राप्त किया। श्रद्धालुओं ने हवन, कन्या पूजन एवं देवी आराधना के साथ आषाढ़ी गुप्त नवरात्रि का समापन किया।
धार्मिक मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि में गोपनीय रूप से की गई साधना और देवी आराधना से साधक की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा आध्यात्मिक सिद्धि की प्राप्ति होती है। पूरे आयोजन का समापन श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ संपन्न हुआ।
हिन्दुस्थान समाचार / धर्मेन्द्र सिंह

