सुपौल में तकनीकी शिक्षा को मिली नई पहचान, निजी पॉलिटेक्निक कॉलेज को एआईसीटीई की मंजूरी
सुपौल, 30 मई (हि.स.)। कोसी क्षेत्र में तकनीकी शिक्षा के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। सुपौल के सिसौनी रोड स्थित राधेश्याम इंस्टीट्यूट ऑफ हायर एजुकेशन को अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई), नई दिल्ली से शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए पॉलिटेक्निक कॉलेज संचालन की आधिकारिक स्वीकृति प्राप्त हो गई है। इस मंजूरी के साथ ही सुपौल जिला आधुनिक तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाने की ओर अग्रसर हो गया है।
एआईसीटीई द्वारा जारी स्वीकृति पत्र के अनुसार संस्थान को विभिन्न तकनीकी डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के संचालन की अनुमति प्रदान की गई है। आगामी शैक्षणिक सत्र से यहां छात्रों के लिए रोजगारोन्मुखी एवं आधुनिक तकनीकी पाठ्यक्रमों में नामांकन प्रक्रिया शुरू की जाएगी। खास बात यह है कि जिले में पहली बार पॉलिटेक्निक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) टेक्नोलॉजी जैसे अत्याधुनिक विषयों की पढ़ाई उपलब्ध होगी, जिससे स्थानीय युवाओं को भविष्य की तकनीकी जरूरतों के अनुरूप शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
संस्थान में कुल 360 सीटों पर नामांकन की व्यवस्था की गई है। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में 30 सीटें, सिविल इंजीनियरिंग में 120 सीटें, कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में 60 सीटें, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में 60 सीटें, ईवी टेक्नोलॉजी में 30 सीटें तथा मैकेनिकल इंजीनियरिंग में 60 सीटों की स्वीकृति दी गई है।
नामांकन से पूर्व राज्य तकनीकी शिक्षा बोर्ड, बिहार, पटना द्वारा प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाएगी, जिसके माध्यम से छात्रों का चयन किया जाएगा।
शिक्षाविदों का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ईवी टेक्नोलॉजी जैसे विषय वर्तमान समय में रोजगार और उद्योग जगत की सबसे बड़ी जरूरत बन चुके हैं। देश-दुनिया में इन क्षेत्रों में प्रशिक्षित तकनीकी विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सुपौल जैसे जिले में इन पाठ्यक्रमों की उपलब्धता क्षेत्र के युवाओं के लिए सुनहरा अवसर साबित होगी। इससे छात्रों को बड़े शहरों का रुख किए बिना ही गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा मिल सकेगी।
अब तक कोसी क्षेत्र के हजारों छात्रों को तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के लिए पटना, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, भागलपुर तथा अन्य बड़े शहरों में जाना पड़ता था। इससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता था और कई प्रतिभाशाली छात्र संसाधनों के अभाव में तकनीकी शिक्षा से वंचित रह जाते थे। लेकिन अब सुपौल में ही पॉलिटेक्निक शिक्षा उपलब्ध होने से छात्रों को अपने घर के नजदीक बेहतर शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। इससे न केवल समय और खर्च की बचत होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर तकनीकी मानव संसाधन का भी विकास होगा।
संस्थान के चेयरमैन डॉ. राधेश्याम यादव ने बताया कि विद्यार्थियों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े, इसके लिए बिहार सरकार की बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना का लाभ भी उपलब्ध कराया जाएगा। इस योजना के तहत छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए चार लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्र-छात्राएं भी बिना किसी चिंता के तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे और अपने करियर को नई दिशा दे पाएंगे।
डॉ. राधेश्याम यादव ने कहा कि यह उपलब्धि केवल संस्थान की नहीं, बल्कि पूरे कोसी क्षेत्र के छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा प्रेमियों के सपनों के साकार होने जैसा है। उनका उद्देश्य ग्रामीण एवं पिछड़े क्षेत्रों के विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराना है, ताकि वे आधुनिक उद्योगों, सूचना प्रौद्योगिकी और तकनीकी क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बना सकें। उन्होंने भरोसा जताया कि संस्थान आधुनिक प्रयोगशालाओं, गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण और अनुभवी शिक्षकों के माध्यम से तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में नया मानक स्थापित करेगा।
उन्होंने आगे कहा कि उनका सपना सुपौल को एक समग्र शैक्षणिक केंद्र के रूप में विकसित करना है, जहां तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ मेडिकल, लॉ और अन्य उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम भी उपलब्ध हों। इसके लिए संस्थान भविष्य में मेडिकल एवं लॉ की पढ़ाई शुरू करने की दिशा में भी कार्य कर रहा है।
शिक्षा जगत से जुड़े लोगों ने एआईसीटीई की इस मंजूरी को सुपौल और पूरे कोसी क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है। उनका मानना है कि यह संस्थान आने वाले वर्षों में क्षेत्र के युवाओं को तकनीकी रूप से दक्ष बनाकर रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा तथा कोसी क्षेत्र को शिक्षा के क्षेत्र में नई पहचान दिलाएगा।
हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र

