जनगणना में मातृभाषा मैथिली को अधिक से अधिक संख्या में शामिल करने हेतु चेतना समिति की बैठक आयोजित

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जनगणना में मातृभाषा मैथिली को अधिक से अधिक संख्या में शामिल करने हेतु चेतना समिति की बैठक आयोजित


सहरसा, 31 अगस्त (हि.स.)।चेतना समिति द्वारा आयोजित जनगणना में मातृभाषा के रूप में मैथिली को अधिक से अधिक संख्या में शामिल करने हेतु प्रारंभिक बैठक देव रिसोर्ट गंगाजला सहरसा के सभागार में प्रो कुलानन्द झा की अध्यक्षता मे संपन्न हुई।

इस अवसर पर महिषी के विधायक ने डॉ गौतम कृष्ण ने कहा कि मैथिली मिथिला में रहने वाले सभी जाति धर्म के लोगों की एकमात्र भाषा है और यह हमलोगों का पुनीत कर्तव्य है कि आगामी में जनगणना में मैथिली को अपनी मातृभाषा के रूप में अंकित कराए।

समारोह में बिहार सरकार के पूर्व मंत्री आलोक रंजन झा ने कहा कि माँ मातृभूमि और मातृभाषा का सम्मान करना किसी भी सभ्य समाज के लिए नितान्त आवश्यक है।इस हेतु आयोजन किए जाने वाले किसी भी कार्यक्रम में अभी सहभागिता देने के लिए सदैव तत्पर रहेंगे। उन्होंने लोगो में अपनी भाषा की प्रति चेतना जागृत करने के लिए चेतना समिति के इस प्रयास की सराहना की।

कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रख्यात भाषाविद प्रो कुलानन्द झा ने कहा कि सहरसा मिथिला के साहित्य चिंतकों की उर्वरा भूमि रही है और मैथिली भाषा के विकास के लिए समय समय वे जन आंदोलन में यहाँ के लोगों की सक्रिय भागीदारी रही है उन्होंने विश्वास दिलाया कि आगामी जनगणना में सहरसा जिला मैथिली भाषा भाषियों की संख्या शत प्रतिशत होगी।

उन्होंने कहा कि जहां मैथिली भाषी लोगों की संख्या कम है वहां इस प्रकार के अभियान चलाकर जागरूकता पर बल दिया।उन्होने इसे प्रखंड एवं पंचायत स्तर तक पहुंचाने मे हर संभव मदद का आश्वासन दिया।उन्होने कहा कि चेतना समिति मिथिला मैथिली हेतु कार्यरत सभी संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित कर इस अभियान को सफल बनाएं।

इस अवसर राजद के प्रदेश महासचिव धनिक लाल मुखिया ने कहा कि कुछ लोगो के द्वारा यह भ्रम फैलाया जाता है कि मैथिली किसी खाश जाति की भाषा है मिथिला में रहने वाले लोगों की भाषा सिर्फ़ मैथिली ही है।इस में कोई संशय नहीं है।

नगर निगम की महापौर बैन प्रिया ने कहा कि हम सबों को अपने दैनिक उपयोग में भी मैथिली को प्रमुख स्थान देनी चाहिए। साथ ही जनगणना मे मातृभाषा मैथिली को अवश्य दर्ज कराने का आग्रह किया।

इस अवसर पर चेतना समिति के अध्यक्ष विवेकानन्द ने कहा कि सहरसा हमेशा से मिथिला की प्रमुख केन्द्र रही है। यहाँ बोली जाने वाली भाषा ही असली मैथिली है। चेतना समिति विभिन्न लोगो से प्राप्त सुझाव पर ध्यान देते हुए उसे कार्यान्वित करने का हरसंभव प्रयास करेगी।

हिन्दुस्थान समाचार / अजय कुमार

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