खोई हुई मुस्कानों को घर वापस ला रही है पूर्व रेलवे

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खोई हुई मुस्कानों को घर वापस ला रही है पूर्व रेलवे


भागलपुर, 02 मई (हि.स.)। रेलवे स्टेशन के व्यस्त प्लेटफॉर्म अक्सर सीटी की आवाज़ों और भागते कदमों से गूंजते रहते हैं, लेकिन इस भीड़ के बीच कभी-कभी मदद की खामोश पुकारें भी होती हैं।

किसी बच्चे के लिए, जो अपने परिवार से बिछड़ गया हो या रास्ता भटक गया हो, पटरियों की यह विशाल दुनिया बेहद डरावनी हो सकती है। इन मासूम आवाज़ों को सुनने और उन्हें सुरक्षित करने के लिए, पूर्व रेलवे ने अपने स्टेशनों को आशा के आश्रय स्थल में बदल दिया है।

पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक मिलिंद देऊस्कर के संवेदनशील नेतृत्व में, बचपन की सुरक्षा एक दिल से जुड़ा मिशन बन गया है। इस नेक कार्य को अमिया नंदन सिन्हा, आईजी-सह-प्रधान मुख्य सुरक्षा आयुक्त, पूर्व रेलवे के अथक प्रयासों से आगे बढ़ाया जा रहा है, जिनकी टीम दिन-रात इस बात के लिए कार्यरत है कि कोई भी बच्चा अंधेरे में न छूटे।

ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते नामक समर्पित पहल के माध्यम से, रेलवे सुरक्षा बल उन बच्चों की पहचान और बचाव की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाता है, जो विभिन्न कारणों से अपने परिवार से बिछड़ जाते हैं। इस मिशन का प्रभाव हर वर्ष बढ़ता जा रहा है। वर्ष 2024-25 के दौरान, 1209 बच्चों को—जिनमें 762 लड़के और 442 लड़कियां शामिल हैं, बचाया गया और उन्हें पुनर्वास के लिए बाल कल्याण समिति को सुरक्षित सौंप दिया गया।

वर्ष 2025-26 में प्रवेश करते हुए, रेलवे सुरक्षा बल ने अपनी सतर्कता और बढ़ा दी और 1407 बच्चों को सफलतापूर्वक बचाया, जिनमें 876 लड़के और 531 लड़कियां शामिल हैं। इन प्रत्येक बचाव के पीछे एक परिवार का पुनर्मिलन और एक बचपन की सुरक्षा की कहानी छिपी है। खोए हुए बच्चों को ढूंढने के अलावा, पूर्व रेलवे मानव तस्करी के अंधेरे के खिलाफ भी एक सशक्त लड़ाई लड़ रहा है, जिसे ऑपरेशन आहट के तहत संचालित किया जा रहा है। यह मिशन शोषण की जंजीरों को तोड़ने और तस्करों के चंगुल से जीवन बचाने पर केंद्रित है।

वर्ष 2024-25 में, 118 बच्चों (97 लड़के और 21 लड़कियां) तथा 06 वयस्कों को बचाया गया, जिससे 57 तस्करों की गिरफ्तारी हुई। यह प्रयास वर्ष 2025-26 में भी जारी रहा, जिसमें 124 बच्चों (80 लड़के और 44 लड़कियां) तथा 01 वयस्क को बचाया गया और 68 तस्करों को गिरफ्तार किया गया। इस सुरक्षा कवच को मजबूत बनाए रखने के लिए, 70 एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स निरंतर कार्यरत हैं, जो संवेदनशील लोगों की रक्षा करते हुए रेलवे नेटवर्क को सभी के लिए सुरक्षित मार्ग बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन अभियानों की वास्तविक सफलता केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि उस खुशी के आंसुओं में दिखाई देती है जब कोई बच्चा सुरक्षित अपने घर लौटता है।

हर बचाव, रेलवे की मानवीय प्रतिबद्धता का प्रमाण है। इन प्रयासों पर टिप्पणी करते हुए, पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम मांझी ने कहा कि हम हर खोए हुए बच्चे को उसके परिवार से मिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

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