मंत्री विजय सिन्हा ने शाहपुर एनकाउंटर पर उठाए सवाल, प्रशासन की लापरवाही को बताया दुर्भाग्यपूर्ण

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पटना, 19 जून (हि.स.)। बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र स्थित बिलौटी गांव में हुए कथित पुलिस एनकाउंटर को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में बहस तेज हो गई है। इस मामले में बिहार सरकार के मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता विजय कुमार सिन्हा ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए घटना को दुःखद और दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि जिस मामले का समाधान प्रशासनिक स्तर पर सहज तरीके से किया जा सकता था, उसे जिस प्रकार अंजाम दिया गया, वह उचित नहीं कहा जा सकता।

विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि सरकार ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लिया है और घटना के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया प्रशासनिक लापरवाही परिलक्षित होती है, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। मंत्री के इस बयान के बाद मामला और अधिक चर्चा में आ गया है, क्योंकि आमतौर पर ऐसे मामलों में सरकार और पुलिस प्रशासन एक-दूसरे के समर्थन में दिखाई देते हैं।

भरत तिवारी की मौत के बाद क्षेत्र में लोगों का आक्रोश खुलकर सामने आया है। ग्रामीणों और परिजनों ने सड़क पर उतरकर पुलिस प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया तथा मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। परिजनों का आरोप है कि भरत तिवारी की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई और पुलिस की कार्रवाई पर कई सवाल खड़े होते हैं।

इस मामले में एक वीडियो भी चर्चा का विषय बना हुआ है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में कथित तौर पर भरत तिवारी पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करते हुए दिखाई दे रहा है। वीडियो में वह अपने पास मौजूद पिस्टल पुलिसकर्मियों को सौंपता नजर आता है। वीडियो सामने आने के बाद कई गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि भरत तिवारी ने आत्मसमर्पण कर दिया था और अपना हथियार पुलिस को सौंप दिया था, तो उसके बाद गोली चलाने की आवश्यकता क्यों पड़ी। सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि वह निहत्था हो चुका था, तो उसे कई गोलियां कैसे लगीं। वहीं यदि पुलिस को अपनी सुरक्षा को लेकर खतरा था, तो आत्मसमर्पण का दृश्य सामने आने के बाद उस दावे की भी जांच जरूरी हो जाती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार के वरिष्ठ मंत्री द्वारा सार्वजनिक रूप से पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाया जाना इस मामले को और गंभीर बना देता है। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार भी पूरे घटनाक्रम को लेकर स्पष्ट और निष्पक्ष जांच चाहती है। अब सभी की निगाहें जांच एजेंसियों की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और पुलिस कार्रवाई नियमों के अनुरूप थी या नहीं।

फिलहाल प्रशासन की ओर से मामले की जांच जारी है और संबंधित तथ्यों को एकत्र किया जा रहा है। परिजन तथा स्थानीय लोग दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और न्याय की मांग कर रहे हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी

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