राष्ट्रीय गाद प्रबंधन नीति की दिशा में बिहार की पहल महत्वपूर्ण : विजय चौधरी

WhatsApp Channel Join Now
राष्ट्रीय गाद प्रबंधन नीति की दिशा में बिहार की पहल महत्वपूर्ण : विजय चौधरी


-उपमुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को दी बधाई, कहा- नदियों को मिलेगा नया जीवन और बाढ़ की भयावहता होगी कम

पटना, 04 नवंबर (हि.स.)। बिहार के उपमुख्यमंत्री-सह-जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने नई दिल्ली में बिहार सरकार और केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को बधाई दी है। उन्होंने इसे राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण पहल बताया।

पटना में बुधवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में विजय चौधरी ने कहा कि नदियों में गाद जमा होना उनकी बदहाली और बाढ़ की भयावहता के प्रमुख कारणों में से एक है। बिहार सरकार पिछले डेढ़ दशक से राष्ट्रीय गाद प्रबंधन नीति की मांग कर रही थी।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि गाद की समस्या की गंभीरता की पहचान वर्ष 2011-12 में हुई थी। उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण की बैठक में इस मुद्दे को उठाया था। उनके आमंत्रण पर तत्कालीन केंद्रीय मंत्री पवन बंसल को बक्सर से फरक्का तक हवाई यात्रा कराकर गंगा में गाद जमा होने से उत्पन्न स्थिति का जायजा भी दिलाया गया था।

विजय चौधरी ने बताया कि वर्ष 2014 में तत्कालीन केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती के समक्ष भी गाद प्रबंधन नीति की आवश्यकता और फरक्का बराज के निर्माण के बाद बिहार के हिस्से में गाद जमा होने की अनियंत्रित गति का मुद्दा उठाया गया था। इसके बाद पहली बार गाद प्रबंधन को लेकर विशेषज्ञ समिति गठित की गई। समिति की रिपोर्ट के आधार पर वर्ष 2022 में तलछट प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय ढांचा प्रस्तावित किया गया। इस पर राज्य सरकारों से सुझाव मांगे गए, लेकिन इसे अब तक अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग ने हाल ही में ‘बिहार जलस्रोत पुनर्स्थापन और गाद प्रबंधन नीति-2026’ तैयार की है। इसमें गाद के निस्तारण की प्रक्रिया और व्यावहारिक उपाय शामिल किए गए हैं। इसी नीति के आधार पर तीन नवंबर को नई दिल्ली में मुख्यमंत्री ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

उन्होंने कहा कि इस पहल से नदियों से गाद निकालने में मदद मिलेगी, जिससे उनका पुनर्जीवन होगा और बाढ़ की भयावहता कम की जा सकेगी। इसके अलावा सड़कों के निर्माण और अन्य विकास कार्यों में मिट्टी भराई के लिए निकाली गई गाद का इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे किसानों की उपजाऊ मिट्टी की कटाई पर भी रोक लगाने में मदद मिलेगी।------------

हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी

Livevns.news Desk
Livevns.news Desk

772457 Articles

Share this story