कला एवं संस्कृति विभाग बच्चों और युवाओं की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध: डॉ. प्रमोद कुमार

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कला एवं संस्कृति विभाग बच्चों और युवाओं की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध: डॉ. प्रमोद कुमार


पटना, 03 जून (हि.स.)। बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग के अंतर्गत बिहार ललित कला अकादमी द्वारा आयोजित आठ दिवसीय 'ग्रीष्मकालीन दृश्य कला कार्यशाला-2026' का बुधवार को शुभारंभ हुआ। कार्यशाला का उद्घाटन बिहार के कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने किया।

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा कि कला एवं संस्कृति विभाग बच्चों और युवाओं की रचनात्मक प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने तथा उन्हें उचित मंच उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि कला किसी भी समाज की सांस्कृतिक पहचान को समृद्ध करने का महत्वपूर्ण माध्यम है और युवा पीढ़ी को इससे जोड़ना समय की आवश्यकता है।

मंत्री ने कहा कि बिहार के विभिन्न जिलों में कला के क्षेत्र में अपार प्रतिभाएं मौजूद हैं, जिन्हें उचित मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और अवसर उपलब्ध कराने की जरूरत है। विभाग का उद्देश्य ऐसी प्रतिभाओं को खोजकर उन्हें आगे बढ़ाने के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कला और संस्कृति के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए कई योजनाओं पर कार्य कर रही है।

इस अवसर पर उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य में कम से कम एक माह की अवधि की आवासीय कला कार्यशाला आयोजित की जाए, जिसमें बिहार के विभिन्न जिलों से चयनित बच्चे और युवा कलाकार भाग ले सकें। इससे प्रतिभागियों को विशेषज्ञ कलाकारों से प्रशिक्षण प्राप्त करने और अपनी कला को निखारने का बेहतर अवसर मिलेगा।

डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा कि ऐसी आवासीय कार्यशालाओं में भाग लेने वाले प्रतिभागियों के लिए आवास, भोजन और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने संबंधी प्रस्ताव पर विभाग गंभीरता से विचार करेगा। उनका मानना है कि इससे दूर-दराज और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले प्रतिभाशाली बच्चों को भी अपनी कला प्रतिभा विकसित करने का समान अवसर मिल सकेगा।

मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में नई पीढ़ी को प्रोत्साहित करना और बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाना है। इस दिशा में विभाग द्वारा समय-समय पर विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं और सांस्कृतिक आयोजन आयोजित किए जाते रहेंगे।

आठ दिवसीय इस कार्यशाला में प्रतिभागियों को चित्रकला, रेखांकन, रंग संयोजन और दृश्य कला की विभिन्न विधाओं का प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही उन्हें अनुभवी कलाकारों के मार्गदर्शन में अपनी रचनात्मक क्षमता विकसित करने का अवसर भी प्राप्त होगा। आयोजकों के अनुसार कार्यशाला का उद्देश्य बच्चों और युवाओं में कला के प्रति रुचि बढ़ाना तथा उनकी सृजनात्मक प्रतिभा को नई दिशा देना है।------------

हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी

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