नर्सिंग संस्थानों के लिए एनओसी की ऑनलाइन प्रक्रिया से गुणवत्ता और पारदर्शिता में होगा सुधार : मंगल पाण्डेय
-बिहार में नर्सिंग संस्थानों को ऑनलाइन मान्यता देने की सुविधा शुरू
पटना, 01 अप्रैल (हि.स.)। बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने बुधवार को नर्सिंग संस्थानों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से ऑनलाइन मान्यता देने की नई सुविधा का शुभारंभ किया। शास्त्रीनगर स्थित ऊर्जा स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) सहित अन्य प्रक्रियाओं के ऑनलाइन होने से व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि एक दशक पहले तक बिहार में नर्सिंग संस्थानों की भारी कमी थी, जिसे लेकर नीतीश कुमार भी चिंतित रहते थे। इसके बाद राज्य सरकार ने नर्सिंग शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई अहम कदम उठाए। मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना के तहत तेजी से सरकारी और निजी नर्सिंग कॉलेज खोले गए। वर्तमान में बिहार में 656 नर्सिंग कॉलेज संचालित हैं, जहां विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए 41,065 सीटें स्वीकृत हैं।
मंगल पांडेय ने कहा कि सरकार नर्सिंग संस्थानों की संख्या बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है, लेकिन इसके साथ ही गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि बिहार के नर्सिंग संस्थानों से प्रशिक्षित छात्र-छात्राएं भविष्य में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाएंगे।
उन्होंने बताया कि आवेदन और एनओसी की ऑनलाइन सुविधा शुरू होने से संस्थान प्रबंधन को अनावश्यक दौड़-भाग से राहत मिलेगी और वे अपनी ऊर्जा गुणवत्ता सुधार में लगा सकेंगे। साथ ही, संस्थानों को अपनी उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी पोर्टल पर अपलोड करनी होगी, जिससे आम लोगों को भी पारदर्शी जानकारी मिल सके।
इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री ने पांच नर्सिंग संस्थानों के एनओसी का ऑनलाइन अनुमोदन करते हुए उन्हें प्रमाण पत्र भी वितरित किए।
कार्यक्रम में विभागीय सचिव लोकेश कुमार सिंह ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए मान्यता प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और गुणवत्ता सुनिश्चित होगी। उन्होंने संस्थानों को निर्धारित मानकों का पालन करने के निर्देश दिए।
इस मौके पर राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यकारी निदेशक अमित कुमार पांडेय, विशेष सचिव शैलेष कुमार सहित कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी

