बिहार विधान परिषद में इंजीनियरिंग कॉलेजों में शिक्षकों की कमी और एनबीए मान्यता का मुद्दा उठा, मंत्री के जवाब पर तीखी नोकझोंक

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पटना, 24 जुलाई (हि.स.)। बिहार विधानमंडल के मानसून सत्र के अंतिम दिन शुक्रवार को विधान परिषद में सरकारी इंजीनियरिंग महाविद्यालयों में शिक्षकों की कमी, आधारभूत सुविधाओं के अभाव और नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रेडिटेशन (एनबीए) की मान्यता का मुद्दा जोरदार ढंग से उठा। इस दौरान सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।

प्रश्नकाल के दौरान विधान पार्षद सौरभ कुमार और महेश्वर सिंह ने कहा कि राज्य के अधिकांश सरकारी इंजीनियरिंग महाविद्यालयों के बीटेक कार्यक्रमों को अब तक नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रेडिटेशन (एनबीए) की मान्यता प्राप्त नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई संस्थानों में मानकों के अनुरूप फैकल्टी की नियुक्ति नहीं हुई है और आवश्यक शैक्षणिक व प्रयोगशाला संसाधनों का भी अभाव है।

महेश्वर सिंह ने कहा कि इन कमियों के कारण छात्रों में असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने कैग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि बिहार के 31 इंजीनियरिंग कॉलेजों और 15 पॉलिटेक्निक संस्थानों में 90 प्रतिशत से अधिक शिक्षकीय और गैर-शिक्षकीय पद रिक्त हैं। उनका कहना था कि जब संस्थानों में पर्याप्त शिक्षक ही नहीं होंगे, तो विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा और बेहतर रोजगार के अवसर कैसे मिल पाएंगे।

प्रश्न के जवाब में सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री शीला मंडल ने कहा कि 11 इंजीनियरिंग महाविद्यालयों के लिए एनबीए मान्यता प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई है और इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार शिक्षकों की नियुक्ति सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में काम कर रही है।

हालांकि मंत्री के जवाब से असंतुष्ट महेश्वर सिंह ने कहा कि सदन में पढ़ा गया उत्तर पहले से ही सदस्यों को उपलब्ध करा दिया गया है। उनका सवाल यह नहीं था कि प्रक्रिया शुरू हुई है, बल्कि यह था कि शिक्षकों की नियुक्ति आखिर कब तक पूरी होगी। उन्होंने सरकार से स्पष्ट समय-सीमा बताने की मांग की।

इसी दौरान सत्ता पक्ष की ओर से पथ निर्माण मंत्री ने हस्तक्षेप करते हुए टिप्पणी की, जिसके बाद सदन का माहौल गर्म हो गया। महेश्वर सिंह ने आपत्ति जताते हुए कहा कि उत्तर संबंधित मंत्री को ही देना चाहिए। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई और कुछ समय के लिए सदन में शोर-शराबे की स्थिति बन गई। बाद में अन्य सदस्यों के हस्तक्षेप से मामला शांत हुआ।

इसी प्रश्नकाल के दौरान विधान पार्षद डॉ. अजय कुमार सिंह ने सुपौल जिले के बसंतपुर प्रखंड स्थित हृदयनगर पंचायत के वार्ड संख्या-10 की दलित बस्ती में सरकारी विद्यालय नहीं होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि करीब दो हजार की आबादी वाले इस क्षेत्र में अब तक एक भी सरकारी विद्यालय नहीं है।

इस पर शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने सदन को बताया कि विद्यालय के लिए भूमि चिह्नित करने का निर्देश दे दिया गया है और आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर शीघ्र आगे की कार्रवाई की जाएगी।--------------

हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी

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