सआईआर पर भ्रम फैलाकर लोगों का भरोसा नहीं जीत सकता इंडी गठबंधन : राजीव रंजन प्रसाद
पटना, 30 सितंबर (हि.स.)। जनता दल यूनाईटेड (जदयू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने जारी बयान में कहा कि आईएनडीआईए गंठबंधन एसआईआर मुद्दे पर भ्रम फैलाकर देश की जनता का भरोसा जीतने में कामयाब नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि हकीकत ये है कि आईएनडीआईए गठबंधन में एकजुटता नहीं है और इसमें शामिल दलों की अलग-अलग विषयों पर अपनी-अपनी राय है।
बैठक से समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव एवं डीएमके और आम आदमी पार्टी के गायब रहने पर उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ‘इस दिल के टुकडे़ हजार हुए कोई यहां गिरा कोई वहां गिरा’।
आईएनडीआईए गठबंधन की बैठक पर तीखा हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि इस गठबंधन में शामिल दलों के दोहरे राजनीतिक चरित्र को देश की जनता गंभीरता से देख रही है। जहां ये दल चुनाव जीतने में कामयाब होते हैं वहां चुनाव आयोग की प्रशंसा करने लगते हैं और जहां ये चुनाव हार जाते हैं वहां ये लोग चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने लगते हैं।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन करने का सबको अधिकार है लेकिन जिन मुद्दों को उठाकर वो आंदोलन करना चाहते हैं उन मुद्दों पर उन्हें लोगों का समर्थन हासिल होना मुश्किल दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि अगर इंडी गठबंधन बिहार में वोट चोरी के कथित आरोपों एवं वोटरों के अधिकारों को लेकर इतना गंभीर था तो उन्होंने एसआईआर के दौरान एक भी आपत्ति क्यों नहीं दर्ज कराई?
हकीकत ये है कि बिहार में एसआईआर के काम पर सुप्रीम कोर्ट ने भी अपनी मुहर लगाई और राज्य में मतदाता पुनरीक्षण का काम पूरी शुद्धता से साथ किया गया। इसका परिणाम था कि मतदान के दौरान कहीं से भी एक भी गड़बड़ी की शिकायत सामने नहीं आई। बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान एक भी बूथ पर पुनर्मतदान नहीं हुआ और हिंसा नहीं हुई।
राहुल गांधी पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि आज राहुल गांधी टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी के साथ बैठक कर रहे हैं, लेकिन बंगाल चुनाव के दौरान राहुल गांधी ने टीएमसी को हराने को लेकर कोई कोर कसर नहीं छोड़ रखी थी। पश्चिम बंगाल में एसआईआर की आड़ में ममता बनर्जी अपने कुशासन को छिपाने की कोशिश कर रही है, जबकि हकीकत ये है कि बंगाल में बेशक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी थीं लेकिन पर्दे के पीछे से सत्ता उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी चला रहे थे।
उन्होंने कहा कि जो पार्टियां आज निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा रही है, उसे अपने शासनकाल के दौरान संवैधानिक एवं चुनावी संस्थाओं से जुड़े निर्णयों और नियुक्तियों के इतिहास को भी याद करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बैठक के बाद जिन कार्यक्रमों की घोषणा की गई है उस कार्यक्रम को सफल बनाने को लेकर आईएनडीआईए गठबंधन के कितने दल कांग्रेस के साथ आते हैं ये भविष्य की बात है लेकिन जिस तरह से तीन प्रमुख दलों ने इस बैठक से दूरी बना ली उससे ये साफ लगता है कि कांग्रेस के फैसलों से इंडी गंठबंधन में शामिल दल ही एक राय नहीं रखते।
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हिन्दुस्थान समाचार / चंदा कुमारी

