पीएमसीएच प्राचार्य प्रकरण पर स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार का सख्त संदेश
-किसी भी लापरवाह, कर्तव्यहीन या भ्रष्ट व्यक्ति के लिए विभाग में कोई जगह नहीं है : निशांत कुमार
पटना, 27 जून (हि.स.)। बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच) के प्राचार्य डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह के खिलाफ की गई प्रशासनिक कार्रवाई और उनके त्यागपत्र के बाद उठे विवाद के बीच राज्य के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि स्वास्थ्य विभाग में लापरवाही, कर्तव्यहीनता और भ्रष्टाचार के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में किसी भी स्तर पर अनियमितता पाए जाने पर आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
स्वास्थ्य मंत्री ने शनिवार को कहा कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए जा चुके हैं। जांच के दौरान डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह का पक्ष भी सुना जाएगा और सभी तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है तथा किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
निशांत कुमार ने बताया कि 23 जून को पीएमसीएच के निरीक्षण और एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए उनके अस्पताल पहुंचने से पहले ही प्राचार्य को दौरे की सूचना दे दी गई थी। इसके बावजूद निरीक्षण के दौरान डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह अस्पताल में मौजूद नहीं थे। मंत्री के अनुसार, उन्होंने अपनी अनुपस्थिति की पूर्व सूचना भी विभाग को नहीं दी और संपर्क करने पर फोन कॉल का भी जवाब नहीं दिया गया।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाना है। इसी उद्देश्य से आने वाले दिनों में राज्य के अन्य सरकारी अस्पतालों का भी औचक निरीक्षण किया जाएगा, ताकि मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें और अस्पतालों की कार्यप्रणाली अधिक जवाबदेह एवं पारदर्शी बन सके।
क्या है पूरा मामला?
गौरतलब है कि 23 जून को स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार पीएमसीएच के निरीक्षण और एक आधिकारिक कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचे थे। उस समय अस्पताल के प्राचार्य डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह अपनी ड्यूटी पर मौजूद नहीं थे। स्वास्थ्य विभाग का आरोप है कि उन्हें कार्यक्रम की पूर्व जानकारी होने के बावजूद उन्होंने अपनी अनुपस्थिति की कोई सूचना नहीं दी।
इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह को प्राचार्य पद से हटा दिया और डॉ. गीता सिन्हा को अगले आदेश तक पीएमसीएच के प्राचार्य का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया।
हालांकि, कार्रवाई के बाद डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह ने पत्रकार वार्ता कर अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि निरीक्षण वाले दिन वे दुर्घटनावश घायल हो गए थे, जिसके कारण अस्पताल नहीं पहुंच सके। अब स्वास्थ्य मंत्री के ताजा बयान के बाद यह मामला और चर्चा में आ गया है। फिलहाल पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच जारी है और जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।----------------
हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी

