खराब प्रदर्शन वाले बैंकों पर बिहार सरकार सख्त, छह माह में सुधार नहीं तो सरकारी जमा पर लगेगी रोक

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पटना, 10 जून (हि.स.)। बिहार सरकार ने राज्य में बैंकिंग सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने और वित्तीय लक्ष्यों की प्रभावी प्राप्ति सुनिश्चित करने के लिए सख्त रुख अपनाया है। राज्य के उपमुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने बुधवार को बैंकों के प्रदर्शन की समीक्षा के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति की अनुशंसाओं को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही राज्य में कमजोर प्रदर्शन करने वाले बैंकों के लिए कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।

विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति ने बैंकों की कार्यप्रणाली में सुधार लाने के उद्देश्य से पांच सूत्रीय रणनीतिक अनुशंसाएं प्रस्तुत की थीं। वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन बैंकों का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं पाया जाएगा, उनकी लगातार निगरानी की जाएगी। यदि अगले छह महीनों के भीतर उनके प्रदर्शन में अपेक्षित सुधार नहीं दिखता है, तो उन बैंकों में सरकारी जमा (गवर्नमेंट डिपॉजिट) रखने पर पूरी तरह रोक लगाने की कार्रवाई की जाएगी।

वित्त विभाग ने राज्य में बैंकिंग सेवाओं और ऋण वितरण की स्थिति में सुधार लाने के लिए कई बैंकों को औपचारिक रूप से पत्र जारी किया है। जिन बैंकों को अपने कार्यकलापों में सुधार के निर्देश दिए गए हैं, उनमें यूको बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, आईडीबीआई बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, बंधन बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, कर्नाटक बैंक, यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक, इंडसइंड बैंक, उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक तथा करूर वैश्य बैंक शामिल हैं।

राज्य सरकार ने बिहार में बैंकिंग व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से इस उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था। यह निर्णय 22 जनवरी 2026 को आयोजित 95वीं त्रैमासिक राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की बैठक में लिया गया था।

समिति का मुख्य उद्देश्य राज्य में बैंकों द्वारा वार्षिक साख योजना (एसीपी) के लक्ष्यों की प्राप्ति, ऋण वितरण की स्थिति तथा साख-जमा अनुपात (सीडी रेशियो) की नियमित समीक्षा करना है। समिति समय-समय पर बैंकों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करेगी और आवश्यक सुधारात्मक कदमों के लिए दिशा-निर्देश जारी करेगी।

वित्त विभाग का मानना है कि इस पहल से राज्य में बैंकिंग सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा, ऋण वितरण की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी तथा वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही कृषि, उद्योग, स्वरोजगार और अन्य विकास योजनाओं के लिए वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे राज्य के आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी

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