चिरांद सभ्यता दुनिया को दिखाती है सतत विकास का मार्ग, वैश्विक समस्याओं के समाधान का है प्राचीन मॉडल : डॉ. प्रमोद चंद्रवंशी

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चिरांद सभ्यता दुनिया को दिखाती है सतत विकास का मार्ग, वैश्विक समस्याओं के समाधान का है प्राचीन मॉडल : डॉ. प्रमोद चंद्रवंशी


छपरा, 30 जून (हि.स.) । सारण जिले के ऐतिहासिक एवं विश्वविख्यात पुरातात्विक स्थल चिरांद में जेष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर गंगा, सरयू और सोन नदियों के संगम तट पर आयोजित 19वें चिरांद चेतना महोत्सव का मंगलवार को भव्य शुभारंभ हुआ। समारोह का उद्घाटन बिहार के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार चंद्रवंशी ने किया।

इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री डॉ. प्रमोद चंद्रवंशी ने कहा कि चिरांद केवल एक पुरातात्विक स्थल नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के विकास का ऐसा जीवंत मॉडल है, जो वर्तमान वैश्विक चुनौतियों के कारणों और उनके समाधान दोनों पर प्रकाश डालता है। उन्होंने कहा कि चिरांद में करीब दस वर्षों तक हुए उत्खनन से प्राप्त पुरातात्विक साक्ष्य यह प्रमाणित करते हैं कि यह क्षेत्र ऋषि परंपरा और कृषि संस्कृति के समन्वय का महत्वपूर्ण केंद्र था। यहां की जीवनशैली प्रकृति, ज्ञान और सामाजिक संतुलन पर आधारित थी।

डॉ. चंद्रवंशी ने कहा कि भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा यहां के लोक व्यवहार में रची-बसी थी और समाज तथा अर्थव्यवस्था की ऐसी व्यवस्था विकसित थी, जो दैहिक, दैविक और भौतिक तापों से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करती थी। आज विश्व जिस अवधारणा को सतत विकास मॉडल (सस्टेनेबल डेवलपमेंट मॉडल) के रूप में स्वीकार कर रहा है, उसका मूल स्वरूप हजारों वर्ष पहले चिरांद की सभ्यता में विद्यमान था।

मंत्री ने महोत्सव के दौरान चिरांद उत्खनन से प्राप्त अवशेषों तथा उसके गौरवशाली इतिहास पर आधारित चित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया। प्रदर्शनी में प्राचीन सभ्यता, कृषि संस्कृति, मानव जीवन के विकास और ऐतिहासिक महत्व को दर्शाने वाले दुर्लभ चित्र एवं जानकारियां प्रदर्शित की गईं।

इसके बाद डॉ. चंद्रवंशी चिरांद स्थित अयोध्या मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर अयोध्या के प्रमुख लक्ष्मण किला की गुरु गद्दी चिरांद स्थित अयोध्या मंदिर में लक्ष्मण किलाधीश महंत श्री मैथिली रमण शरण जी महाराज, प्रसिद्ध संत मौनी बाबा तथा अन्य धर्माचार्यों के साथ चिरांद के सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्व के पुनर्स्थापन और उसके संरक्षण पर विस्तृत चर्चा की।

समारोह में साहित्य, कला, पर्यावरण, कृषि एवं समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को 'चिरांद रत्न सम्मान' से सम्मानित किया गया। साहित्य एवं पत्रकारिता के लिए प्रो. अरुण कुमार भगत, पर्यावरण संरक्षण के लिए रामबिलास शाण्डिल्य, संगीत के लिए पंडित रामप्रकाश मिश्र, कृषि के लिए साक्षी कुमारी तथा समाज सेवा के लिए डॉ. डी.के. ओझा को सम्मान प्रदान किया गया।

गंगा पूजन और भव्य गंगा महाआरती के साथ प्रारंभ हुए समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, विद्वान, शोधकर्ता, सामाजिक कार्यकर्ता एवं विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यक्रम के सहभागी संगठन गंगा समग्र के राष्ट्रीय मंत्री रामाशीष ने कहा कि भारत की संस्कृति और ज्ञान परंपरा का विकास सदानीरा नदियों के किनारे हुआ है। भारतीय संस्कृति रंग, नस्ल, भाषा और सीमाओं से ऊपर उठकर संपूर्ण मानवता के कल्याण का संदेश देती है तथा चिरांद उसी महान सांस्कृतिक धारा का प्राचीन केंद्र है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र कार्यवाह डॉ. मोहन सिंह ने इस मौके पर कहा कि आज जब विश्व अनेक संकटों से जूझ रहा है, तब भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक चिंतन से पूरी मानवता को नई आशा मिल रही है। उन्होंने कहा कि चिरांद जैसी ऐतिहासिक धरोहरें भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक वैभव की अमूल्य पहचान हैं।

जयप्रकाश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रमेन्द्र कुमार वाजपेयी ने कहा कि चिरांद केवल भारत ही नहीं, बल्कि विश्व इतिहास के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। यहां उत्खनन से प्राप्त प्रमाणों ने इतिहास को नई दृष्टि प्रदान की है और भारतीय सभ्यता के विकासक्रम की बिखरी कड़ियों को एक सूत्र में जोड़ने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि चिरांद पर और व्यापक शोध तथा संरक्षण की आवश्यकता है, ताकि इसकी ऐतिहासिक विरासत आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंच सके।

महोत्सव के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, विचार गोष्ठियों और विरासत संरक्षण से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया। पूरे आयोजन में भारतीय संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण, नदी सभ्यता और चिरांद की ऐतिहासिक महत्ता को केंद्र में रखकर समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का संदेश दिया गया।-------------

हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी

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