बांकीपुर उपचुनाव पर लोगों की राय, भाजपा-जन सुराज के बीच हो सकता है सीधा मुकाबला
पटना, 10 जुलाई (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद रिक्त हुई बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। राजधानी पटना की इस हाईप्रोफाइल सीट पर 30 जुलाई को मतदान होगा, जबकि मतगणना तीन अगस्त को होगी। चुनावी सरगर्मियों के बीच स्थानीय स्तर पर विभिन्न राजनीतिक दलों के समर्थकों और मतदाताओं के बीच चुनावी चर्चा भी तेज हो गई है।
बांकीपुर सीट लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है। नितिन नवीन यहां से लगातार पांच बार विधायक चुने गए। उनके राज्यसभा जाने के बाद इस सीट पर हो रहे उपचुनाव में भाजपा ने युवा नेता अभिषेक कुमार सिन्हा 'बंटी' को उम्मीदवार बनाया है। वहीं राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने एक बार फिर रेखा गुप्ता पर भरोसा जताया है। जन सुराज पार्टी के सूत्रधार (संस्थापक) प्रशांत किशोर के भी इस सीट से चुनाव मैदान में उतरने वाले हैं। उनके 13 जुलाई को नामांकन दाखिल करने की उम्मीद जताई जा रही है।
इससे पहले वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में नितिन नवीन को 98,299 मत मिले थे, जो कुल मतों का 62.66 प्रतिशत था। उन्होंने राजद प्रत्याशी रेखा गुप्ता को पराजित किया था, जिन्हें 46,363 मत (29.55 प्रतिशत) प्राप्त हुए थे। जन सुराज पार्टी की उम्मीदवार वंदना कुमारी को 7,717 मत (4.92 प्रतिशत) मिले थे, जबकि 1,464 मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना था। इस बार नितिन नवीन के चुनाव मैदान में नहीं होने के कारण मुकाबले को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों और मतदाताओं के बीच अलग-अलग आकलन किए जा रहे हैं।
गुरुवार (09 जुलाई) को भाजपा प्रत्याशी अभिषेक कुमार सिन्हा और राजद प्रत्याशी रेखा गुप्ता ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। दोनों दलों के नेताओं ने चुनाव प्रचार भी तेज कर दिया है। जन सुराज की ओर से भी चुनावी तैयारियां जारी हैं और पार्टी अपने अभियान को लगातार धार देने में जुटी है।
चुनाव को लेकर स्थानीय लोगों की भी अलग-अलग राय सामने आ रही है। चिरैयाटांड़ मंडल के चांदमारी रोड निवासी मुकेश कुमार ने बताया कि उनका परिवार लंबे समय से भाजपा का समर्थक रहा है, लेकिन इस बार क्षेत्र में बदलाव की चर्चा अधिक सुनने को मिल रही है। उनके अनुसार लोकतंत्र में समय-समय पर बदलाव भी आवश्यक होता है। हालांकि उनका मानना है कि चुनाव में भाजपा और जन सुराज के बीच मुकाबला रोचक हो सकता है।
बाकरगंज के व्यवसायी अभिषेक कुमार ने कहा कि नितिन नवीन ने क्षेत्र में काफी विकास कार्य किए हैं, लेकिन उनके चुनाव मैदान में नहीं रहने से इस बार चुनाव पहले की तुलना में अधिक दिलचस्प हो गया है। उन्होंने कहा कि मतदाताओं के बीच विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हो रही है और सभी दल अपने-अपने पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
मंदिरी क्षेत्र के निवासी सुमीत राय ने कहा कि चुनाव में अभी समय है और प्रचार अभियान के आगे बढ़ने के साथ मतदाताओं का रुझान और स्पष्ट होगा। वहीं उसी क्षेत्र के सुजीत सिन्हा का कहना है कि राज्य और केंद्र सरकार के कार्यों के आधार पर भाजपा को लाभ मिलेगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि प्रशांत किशोर के चुनाव मैदान में उतरने से मुकाबला पहले की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी हो सकता है और जीत का अंतर प्रभावित हो सकता है।
बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में जातीय समीकरण भी चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण आधार माने जाते हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, क्षेत्र में कायस्थ मतदाता लगभग 14 प्रतिशत, यादव 12 प्रतिशत, मुस्लिम और चंद्रवंशी 9-9 प्रतिशत, वैश्य 9 प्रतिशत, दलित और भूमिहार 8-8 प्रतिशत, ब्राह्मण 7 प्रतिशत, राजपूत और कुर्मी 5-5 प्रतिशत तथा कुशवाहा लगभग 3 प्रतिशत हैं। अन्य वर्गों की हिस्सेदारी करीब 11 प्रतिशत बताई जाती है। ऐसे में विभिन्न राजनीतिक दल सामाजिक समीकरणों और स्थानीय मुद्दों को ध्यान में रखकर चुनाव प्रचार की रणनीति तैयार कर रहे हैं।
राजनीति के जानकारों का मानना है कि बांकीपुर का यह उपचुनाव केवल एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के लिए अपनी संगठनात्मक ताकत, जनसमर्थन और चुनावी रणनीति परखने का भी महत्वपूर्ण अवसर होगा। ऐसे में सभी प्रमुख दल इस सीट पर पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी

