बिहार के महाधिवक्ता पीके शाही ने दिया इस्तीफा

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बिहार के महाधिवक्ता पीके शाही ने दिया इस्तीफा


पटना, 14 जून (हि.स.)। बिहार के महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) प्रशांत कुमार शाही उर्फ पीके शाही ने रविवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के साथ ही राज्य का सर्वोच्च कानूनी पद रिक्त हो गया है। हालांकि उन्होंने किन कारणों से यह निर्णय लिया, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। उनके अचानक इस्तीफे से राज्य के राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

पीके शाही बिहार की राजनीति और विधि जगत का एक जाना-पहचाना नाम हैं। वे लंबे समय से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी सहयोगियों में गिने जाते रहे हैं और सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। महाधिवक्ता के रूप में उन्होंने पटना उच्च न्यायालय में बिहार सरकार का प्रभावी ढंग से पक्ष रखा और सरकार के प्रमुख कानूनी सलाहकार की भूमिका निभाई।

उल्लेखनीय है कि पीके शाही को 16 जनवरी 2023 को बिहार का महाधिवक्ता नियुक्त किया गया था। तत्कालीन महाधिवक्ता ललित किशोर के इस्तीफे के बाद राज्य सरकार ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी थी। इसके बाद से वे राज्य सरकार से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों में न्यायालय के समक्ष सरकार का पक्ष रखते रहे।

कानूनी क्षेत्र में पीके शाही का अनुभव काफी व्यापक माना जाता है। अपने पूर्व कार्यकालों में उन्होंने राज्य सरकार को कई महत्वपूर्ण मामलों में कानूनी परामर्श दिया था। प्रशासनिक सुधारों, पुलिस व्यवस्था के पुनर्गठन तथा विभिन्न विधायी पहल को कानूनी आधार प्रदान करने में उनके कार्यालय की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। कानूनी सहायता सेवा प्राधिकरणों के विस्तार और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को मजबूत बनाने में भी उनका योगदान उल्लेखनीय माना जाता है।

राजनीतिक जीवन में भी पीके शाही की सक्रिय भूमिका रही है। वर्ष 2010 से 2015 तक वे नीतीश कुमार सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे। इस दौरान उन्होंने पहले शिक्षा विभाग और बाद में वन एवं पर्यावरण विभाग का दायित्व संभाला। शिक्षा मंत्री के रूप में उन्होंने कई नीतिगत फैसलों और सुधारात्मक पहलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

उनके इस्तीफे के बाद अब राज्य सरकार के सामने नए महाधिवक्ता की नियुक्ति की चुनौती होगी। महाधिवक्ता राज्य सरकार का सर्वोच्च विधिक अधिकारी होता है, जो सरकार को कानूनी सलाह देने के साथ-साथ उच्च न्यायालय और अन्य न्यायिक मंचों पर उसका पक्ष रखता है। ऐसे में इस पद पर नियुक्ति को लेकर राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर विशेष महत्व माना जा रहा है।

फिलहाल राज्य सरकार की ओर से इस्तीफे पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषक और कानूनी विशेषज्ञ अब इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि सरकार इस महत्वपूर्ण पद के लिए किसे जिम्मेदारी सौंपती है और पीके शाही के इस्तीफे के पीछे क्या कारण रहे।-----------

हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी

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