बिहार में आर-पार की लड़ाई! राजस्व अधिकारियों ने सरकार की ‘धमकी’ ठुकराई
- राजस्व अधिकारियों का अल्टीमेटम, वादे निभाए सरकार, नहीं तो जारी रहेगी हड़ताल
पटना, 03 अप्रैल (हि.स.)। बिहार में राजस्व सेवा के अधिकारियों की हड़ताल अब सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। एक तरफ सरकार सख्त रुख अपनाए हुए है तो दूसरी ओर बिहार राजस्व सेवा संयुक्त महासंघ ने भी दो टूक शब्दों में अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच बिहार में प्रशासनिक कामकाज और खासकर भूमि सर्वे जैसे अहम कार्यों पर असर पड़ने की आशंका भी बढ़ती जा रही है।
बिहार में राजस्व सेवा के हड़ताली अधिकारियों और सरकार के बीच टकराव अब चरम पर पहुंच गया है। अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि वे किसी भी दबाव में झुकने वाले नहीं हैं और अपनी मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई जारी रखेंगे।
महासंघ ने उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के हालिया बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। अधिकारियों ने कहा कि कुंडली खंगालने और होम्योपैथिक-एलोपैथिक इलाज जैसे शब्दों का इस्तेमाल न केवल अपमानजनक है, बल्कि यह संवाद की जगह टकराव को बढ़ावा देता है। अधिकारियों का कहना है कि 1000 से अधिक राजपत्रित अधिकारियों को बीमार बताना और इलाज की बात करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि धमकी देने के बजाय सम्मानजनक बातचीत का रास्ता अपनाया जाए।
क्या है मुख्य मांग?
हड़ताली अधिकारियों का कहना है कि वे कोई नई मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि 9 फरवरी को सरकार के साथ हुई बातचीत में जो सहमति बनी थी, उसी को लागू करने की मांग कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांग राजस्व सेवा के अधिकारियों को डीसीएलआर पद पर नियुक्त करने की है। जब तक यह मांग पूरी नहीं होती, हड़ताल जारी रहेगी।
भूमि सर्वे पर भी उठे सवाल
महासंघ ने भूमि सर्वेक्षण की धीमी प्रगति को लेकर भी सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। उनका कहना है कि भूमि विवादों के समाधान के लिए सर्वे बेहद जरूरी है, लेकिन इसकी रफ्तार बेहद धीमी है और बार-बार समय सीमा बढ़ाई जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि इसके लिए केवल अधिकारी जिम्मेदार हैं या फिर व्यवस्था की खामियां भी उतनी ही जिम्मेदार हैं।
स्वाभिमान की लड़ाई का ऐलान
पटना सदर, दानापुर, फुलवारी और फतुहा जैसे अहम अंचलों में तैनात अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि वे जबरन थोपी गई शर्तों के आगे झुकने के बजाय अपने स्वाभिमान की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेंगे। अधिकारियों ने सरकार को सीधा संदेश देते हुए कहा कि हम टकराव नहीं, समाधान चाहते हैं। सरकार को चाहिए कि वह डराने या बदनाम करने के बजाय अपने वादों को निभाए और बातचीत के जरिए रास्ता निकाले।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ .राजेश

