पटना के 10 सर्कुलर रोड आवास को लेकर बढ़ा विवाद, राबड़ी देवी बोलीं- किसी कीमत पर खाली नहीं करेंगे घर
पटना, 30 मई (हि.स.) । बिहार की राजधानी पटना स्थित पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी आवास 10 सर्कुलर रोड को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। राज्य सरकार द्वारा आवास का पुनः आवंटन किए जाने के बाद राबड़ी देवी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी परिस्थिति में यह आवास खाली नहीं करेंगी। उनके इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है।
राबड़ी देवी शनिवार को दिल्ली से पटना लौटीं। वह अपने पोते इराज लालू यादव का जन्मदिन मनाने के लिए दिल्ली गई हुई थीं। पटना पहुंचते ही उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि 10 सर्कुलर रोड आवास खाली करने का कोई सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि उनका परिवार इस आवास को नहीं छोड़ेगा।
10 सर्कुलर रोड का आवास पिछले लगभग दो दशकों से बिहार की राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की अनेक राजनीतिक गतिविधियों का संचालन इसी आवास से होता रहा है। पार्टी की कई महत्वपूर्ण बैठकों और रणनीतिक निर्णयों का गवाह रहा यह आवास लालू यादव और उनके परिवार के लिए राजनीतिक और भावनात्मक रूप से भी विशेष महत्व रखता है।
राजद नेताओं का मानना है कि यह केवल एक सरकारी आवास नहीं बल्कि पार्टी के राजनीतिक इतिहास का अहम हिस्सा है। यही वजह है कि राबड़ी देवी और उनका परिवार इसे खाली करने के पक्ष में नहीं दिख रहा है।
दरअसल, साल 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में राजद को करारी हार का सामना करना पड़ा। चुनाव परिणामों के बाद राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिले। नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने और फिर सत्ता हसतांतरण के बाद भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली।
नई सरकार के गठन के बाद पूर्व मुख्यमंत्रियों और अन्य नेताओं को आवंटित सरकारी आवासों की समीक्षा की गई। इसी प्रक्रिया के तहत 10 सर्कुलर रोड आवास को खाली करने का निर्देश जारी किया गया, जिससे विवाद शुरू हुआ।
विवाद उस समय और बढ़ गया जब राज्य सरकार ने 29 मई (शुक्रवार) को 10 सर्कुलर रोड आवास को डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के मंत्री नंदकिशोर राम के नाम आवंटित कर दिया। भवन निर्माण विभाग की ओर से जारी आदेश में आवास का नया आवंटन सुनिश्चित किया गया है।
सरकार के इस फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया कि प्रशासन आवास का कब्जा नए आवंटी को सौंपने की प्रक्रिया आगे बढ़ाना चाहता है। हालांकि राबड़ी देवी के सख्त रुख ने मामले को राजनीतिक रंग दे दिया है।
राबड़ी देवी के आवास खाली न करने के बयान के बाद सत्ता पक्ष और राजद के बीच टकराव की स्थिति बन सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल सरकारी आवास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे सत्ता परिवर्तन के बाद की राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और प्रतीकात्मक राजनीति भी जुड़ी हुई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी

