तुष्टिकरण के ताबूत की आखिरी कील: चुनावी नतीजों ने किया विभाजनकारी राजनीति का अंत : ऋतुराज सिन्हा

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तुष्टिकरण के ताबूत की आखिरी कील: चुनावी नतीजों ने किया विभाजनकारी राजनीति का अंत : ऋतुराज सिन्हा


पटना, 4 मई (हि.स.)। भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री ऋतुराज सिन्हा ने पश्चिम बंगाल सहित चार राज्यों के चुनाव परिणामों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आज भारत की राजनीति से 'वोट बैंक' और 'तुष्टिकरण' का दौर हमेशा के लिए समाप्त हो चुका है।

उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी की सत्ता से विदाई इस बात का जीवंत प्रमाण है कि जनता अब उस मॉडल को कतई बर्दाश्त नहीं करेगी, जहां अल्पसंख्यक तुष्टिकरण के नाम पर बहुसंख्यक समाज के साथ दोहरा व्यवहार किया जाता है। बंगाल की माताओं-बहनों ने अपनी असुरक्षा और युवाओं ने अपने भविष्य के साथ हुए खिलवाड़ का पाई-पाई का हिसाब आज 'वोट की चोट' से चुकता कर दिया है।

सिन्हा ने कहा कि तमिलनाडु और केरल में जो लोग 'सनातन धर्म' और भारतीय संस्कृति को अपमानित कर अपनी राजनीति चमका रहे थे, उन्हें जनता ने कड़ा सबक सिखाया है। दक्षिण भारत अब परिवारवाद और छद्म-धर्मनिरपेक्षता के चंगुल से आजाद होकर राष्ट्रवाद की मुख्यधारा से जुड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि आज आया यह प्रचंड जनादेश विपक्षी गठबंधन' के उन दलों के मुंह पर करारा तमाचा है, जो जाति और धर्म के नाम पर समाज को बांटकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने का मुगालता पाले हुए थे।

उन्होंने कहा कि देश की जनता ने साफ संदेश दे दिया है कि उन्हें विभाजनकारी राजनीति नहीं, बल्कि सुरक्षित माहौल और सुशासन चाहिए। जो दल आज भी 'वोट जिहाद' जैसे हथकंडों के भरोसे बैठे हैं, उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि अब देश में केवल वही टिकेगा जो “सबका साथ, सबका विकास” के पथ पर चलेगा। तुष्टिकरण की राजनीति का चैप्टर अब इस देश में हमेशा के लिए क्लोज़ हो चुका है।

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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी

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