नेपाल के तराई क्षेत्र में हो रही बारिश से मुजफ्फरपुर की प्रमुख नदियों का जलस्तर बढ़ा

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नेपाल के तराई क्षेत्र में हो रही बारिश से मुजफ्फरपुर की प्रमुख नदियों का जलस्तर बढ़ा


नेपाल के तराई क्षेत्र में हो रही बारिश से मुजफ्फरपुर की प्रमुख नदियों का जलस्तर बढ़ा


मुजफ्फरपुर, 23 जुलाई (हि.स.)।

नेपाल के तराई क्षेत्रों और जललग्रहण इलाकों में लगातार हो रही भारी बारिश का सीधा असर बिहार के मुजफ्फरपुर जिले पर दिखने लगा है। जिले की प्रमुख नदियों के जलस्तर में तेजी से उतार-चढ़ाव दर्ज किया जा रहा है। स्थिति को देखते हुए जिला आपदा प्रबंधन विभाग और जल संसाधन विभाग पूरी तरह सतर्क मोड पर हैं। जिला आपातकालीन संचालन केंद्र द्वारा गुरुवार सुबह 6 बजे जारी किए गए दैनिक जलस्तर और बाढ़ पूर्वानुमान आंकड़ों के अनुसार, जिले से गुजरने वाली मुख्य नदियों के गेज स्टेशनों पर पानी का दबाव लगातार बना हुआ है।

ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, बागमती नदी का जलस्तर खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंच गया है। कटौझा स्थित गेज स्टेशन पर बागमती नदी का आज का जलस्तर 54.45 मीटर दर्ज किया गया है। यहां नदी का खतरे का निशान 55.00 मीटर निर्धारित है। हालांकि, राहत की बात यह है कि पिछले कुछ घंटों में यहां जलस्तर की प्रवृत्ति में मामूली गिरावट देखी गई है, लेकिन नेपाल में दोबारा बारिश होने पर यह कभी भी खतरे के निशान को पार कर सकती है। इस क्षेत्र का अब तक का उच्चतम जलस्तर वर्ष 2021 में 58.34 मीटर रहा था।

दूसरी ओर, गंडक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। रेवाघाट गेज स्टेशन पर गंडक नदी का आज का जलस्तर 53.51 मीटर मापा गया है, जो खतरे के निशान 54.41 मीटर से अब सिर्फ 0.90 मीटर नीचे रह गया है। विभाग के अनुसार, रेवाघाट में नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने की प्रवृत्ति में है, जिसने तटवर्ती इलाकों के ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। इसके अलावा, सिकंदरपुर में बूढ़ी गंडक नदी का जलस्तर फिलहाल 50.22 मीटर पर स्थिर बना हुआ है, जो खतरे के निशान 52.53 मीटर से सुरक्षित दूरी पर है।

नदियों के इस बदलते मिजाज को देखते हुए कनीय अभियंता, जल निस्सरण प्रमंडल-सह-प्रतिनियुक्त अभियंता, जिला बाढ़ नियंत्रण कक्ष ने सभी तटबंधों की निगरानी बढ़ा दी है। जिला प्रशासन ने निचले इलाकों और दियारा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की हिदायत दी है। बाढ़ सुरक्षात्मक सामग्रियों की उपलब्धता सुनिश्चित कर दी गई है और चौबीसों घंटे इंजीनियरों की टीम स्थिति पर नजर रखे हुए है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

हिन्दुस्थान समाचार / मनोज कुमार

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