भारत की संस्कृति ही विश्व की समस्याओं का समाधान, अपनी विरासत पर करें गर्व : रामाशीष सिंह

WhatsApp Channel Join Now
भारत की संस्कृति ही विश्व की समस्याओं का समाधान, अपनी विरासत पर करें गर्व : रामाशीष सिंह


सीवान, 26 जून (हि.स.)। दयानंद आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, सीवान में चेतना (प्रज्ञा प्रवाह) की जिला इकाई द्वारा भारत बोध और सांस्कृतिक अवधारणा विषय पर व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति, सभ्यता और उसके वैश्विक महत्व पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। मुख्य वक्ता प्रज्ञा प्रवाह की राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति के सदस्य एवं प्रचारक रामाशीष सिंह ने कहा कि दुनिया में वास्तविक अर्थों में धर्म की अवधारणा केवल भारत में है, जबकि अन्य देशों में मजहब या रिलिजन की अवधारणा प्रचलित है।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की दृष्टि मानव, प्रकृति और संपूर्ण सृष्टि के बीच समन्वय स्थापित करने वाली रही है। विभिन्न ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि धरती को मां कहकर संबोधित करने की परंपरा भारत में सहस्रों वर्षों से चली आ रही है। विषय प्रस्तुति करते हुए डॉ. अशोक प्रियंबद ने कहा कि भारत विश्व के सबसे प्राचीन जीवंत राष्ट्रों में से एक है। इसकी सभ्यता और संस्कृति आज भी संपूर्ण विश्व का मार्गदर्शन करने में सक्षम है।

उन्होंने कहा कि आज दुनिया जिन पर्यावरणीय और सामाजिक संकटों से जूझ रही है, उनका स्थायी समाधान भारतीय संस्कृति में निहित है, क्योंकि भारतीय जीवन-दर्शन प्रकृति के साथ समन्वय पर आधारित है, संघर्ष पर नहीं।कार्यक्रम की अध्यक्षता दयानंद आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के संरक्षक एवं पूर्व प्राचार्य डॉ. प्रजापति त्रिपाठी ने की। उन्होंने अपने

अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति विश्व की सर्वश्रेष्ठ संस्कृति है, जो मानवता, समरसता और विश्व बंधुत्व का संदेश देती है। आज पूरी दुनिया भारतीय संस्कृति, योग और जीवनशैली की ओर आकर्षित हो रही है, इसलिए प्रत्येक भारतीय को अपनी संस्कृति पर गर्व होना चाहिए।

हिन्दुस्थान समाचार / Amar Nath Sharma

Share this story