भामती वाचस्पति महोत्सव का भव्य शुभारम्भ, जुटे दिग्गज विद्वान

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मधुबनी, 15 मार्च (हि.स.)। जिला के अंधराठाढी प्रखंड में रविवार को भामती वाचस्पति महोत्सव–2026 का परिचर्चा सत्र के साथ भव्य शुभारंभ हुआ।

मौके पर उपस्थित गणमान्य लब्धप्रतिष्ठ विद्वानों नें बताया कि यह कार्यक्रम मधुबनी की सांस्कृतिक, दार्शनिक और बौद्धिक विरासत को नई ऊर्जा देने वाला ऐतिहासिक आयोजन है।

कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार तथा जिला प्रशासन, मधुबनी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “भामती वाचस्पति महोत्सव मिथिला की समृद्ध दार्शनिक परंपरा, सांस्कृतिक चेतना तथा ज्ञान-साधना की गौरवशाली विरासत को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

आयोजन स्थल पर विद्वानों, शिक्षाविदों, संस्कृति प्रेमियों, शोधार्थियों एवं आम नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति ने इस महोत्सव को विशेष गरिमा प्रदान की।

शुभारंभ अवसर पर उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो रमाकांत पाण्डेय, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी नीतीश कुमार, भामती वाचस्पति समिति के अध्यक्ष रत्नेश्वर झा, प्रो देवनारायण झा, प्रो सुरेश्वर झा, प्रो दीपनाथ झा तथा डॉ संजीत कुमार सहित अनेक विद्वतजन एवं गणमान्य व्यक्तित्व उपस्थित रहे।

सभी अतिथियों ने भामती और वाचस्पति मिश्र की दार्शनिक परंपरा, मिथिला की बौद्धिक धरोहर और भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त कि कया।

परिचर्चा सत्र में वक्ताओं ने कहा कि मधुबनी केवल कला और लोक संस्कृति की भूमि ही नहीं, बल्कि दर्शन, तर्कशास्त्र, शास्त्रार्थ और वैचारिक परंपरा की भी एक महान भूमि रही है। वाचस्पति मिश्र और भामती जैसी विभूतियां इस क्षेत्र की उस प्रखर बौद्धिक चेतना का प्रतीक हैं, जिसने भारतीय ज्ञान-संपदा को नई दिशा दी। वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि ऐसे महोत्सव नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने, सांस्कृतिक अस्मिता को मजबूत करने तथा स्थानीय गौरव को राष्ट्रीय विमर्श से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनते हैं।

अवसर पर कार्यक्रम से संबंधित महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट्री “सर्वतन्त्र स्वतंत्र” का विधिवत विमोचन किया गया। यह डॉक्यूमेंट्री भामती-वाचस्पति परंपरा, मिथिला की ज्ञानधारा तथा इस सांस्कृतिक विरासत के विभिन्न आयामों को प्रभावकारी ढंग से प्रस्तुत करती है। इसके साथ ही स्मारिका “वाचस्पति दर्पण–2026” का भी औपचारिक लोकार्पण किया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / लम्बोदर झा

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