खरना के प्रसाद संग तपस्या की शुरुआत, छठी मैया की भक्ति में डूबा सुपौल

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सुपौल, 23 मार्च (हि.स.)। चैती छठ महापर्व के दूसरे दिन सोमवार को पूरे जिले में आस्था, अनुशासन और तपस्या का अद्भुत संगम देखने को मिला।

खरना के पावन अनुष्ठान के साथ ही व्रतियों ने 36 घंटे के कठिन निर्जला उपवास का संकल्प लिया, जिससे पूरा सुपौल भक्ति के रंग में रंग गया। घर-घर में श्रद्धा और शुद्धता का ऐसा वातावरण दिखा, मानो हर आंगन एक छोटा तीर्थ बन गया हो।सुबह से ही व्रतियों ने विधि-विधान के साथ खरना की तैयारी शुरू कर दी।

दिनभर साफ-सफाई, प्रसाद निर्माण और पूजा की व्यवस्था में लोग जुटे रहे। शाम होते ही गुड़ की खीर, रोटी और केले का प्रसाद बनाकर भगवान सूर्य और छठ पूजा की अधिष्ठात्री छठी मैया को अर्पित किया गया। इसके बाद व्रतियों ने प्रसाद ग्रहण कर निर्जला व्रत का संकल्प लिया, जो अगले 36 घंटे तक जारी रहेगा।

इस अवसर पर पारिवारिक एकता की भी झलक देखने को मिली। घर के सभी सदस्य व्रतियों की सेवा और सहयोग में लगे रहे, जिससे भावनात्मक जुड़ाव और पारंपरिक संस्कृति का सशक्त प्रदर्शन हुआ। यह पर्व केवल व्यक्तिगत आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और पारिवारिक बंधन को मजबूत करने का माध्यम भी बन गया है।शहर से लेकर गांव तक छठी मैया के पारंपरिक गीतों की गूंज वातावरण को भक्तिमय बना रही है। “कांच ही बहंगिया बहंगी लचकत जाए...” जैसे लोकगीत हर गली, चौक और घाट पर सुनाई दे रहे हैं, जो लोगों की आस्था को और गहरा कर रहे हैं।

अब सभी की निगाहें मंगलवार पर टिकी हैं, जब व्रती अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित करेंगे। नदी किनारे और तालाबों के घाटों पर स्वयंसेवक भी मुस्तैदी से जुटे हुए हैं, ताकि पूजा-अर्चना में किसी प्रकार की बाधा न आए। पूरा सुपौल इन दिनों आस्था, समर्पण और छठी मैया के प्रति अटूट विश्वास की भावना में बंधा हुआ नजर आ रहा है।

चैती छठ महापर्व आत्मसंयम, श्रद्धा और सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण है। जैसे-जैसे अर्घ्य का समय करीब आ रहा है, वैसे-वैसे भक्ति की यह लहर और भी गहराती जा रही है, जो हर दिल को एक सूत्र में पिरो रही है।

हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र

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