भगैत मानवता की असली पाठशाला है : डॉ. अमन

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भगैत मानवता की असली पाठशाला है : डॉ. अमन


सुपौल, 02 अक्टूबर (हि.स.)। अखिल भारतीय लोकगाथा भगैत महासभा के तत्वावधान में राघोपुर प्रखंड अंतर्गत जहलीपट्टी गांव में लोकगाथा भगैत के संरक्षण, संवर्धन एवं इसके ऐतिहासिक महत्व को लेकर आवश्यक बैठक आयोजित की गई।

फुर्तीलाल पंजियार की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में भगैत की समृद्ध परंपरा को संरक्षित करने, नई पीढ़ी तक पहुंचाने तथा इसे व्यापक स्तर पर पहचान दिलाने को लेकर विचार-विमर्श किया गया।

बैठक को संबोधित करते हुए महासभा के प्रवक्ता डॉ. अमन कुमार ने कहा कि लोकगाथा भगैत किसी जाति, धर्म या व्यक्ति विशेष की संपत्ति नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज की साझा सांस्कृतिक धरोहर है।

उन्होंने कहा कि भगैत भारतीय संस्कृति और सभ्यता की मौखिक परंपरा को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है।

डॉ. अमन ने कहा कि भगैत बिहार की सांस्कृतिक आत्मा है, जो सदियों से मौखिक परंपरा के माध्यम से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचती रही है। इसके माध्यम से लोकजीवन, सामाजिक मूल्यों, संघर्षों और मानवीय संवेदनाओं की अभिव्यक्ति होती रही है।

उन्होंने कहा कि समय के साथ इस महत्वपूर्ण लोक परंपरा के विलुप्त होने का खतरा बढ़ रहा है। ऐसे में भगैत की गाथाओं को लिपिबद्ध करने के साथ-साथ उनका दस्तावेजीकरण और संरक्षण बेहद आवश्यक है। ‘भगैत मानवता की असली पाठशाला’

डॉ. अमन कुमार ने कहा कि भगैत मानवता की असली पाठशाला है। यह केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि एक चलता-फिरता विश्वविद्यालय है। इसमें इतिहास, समाजशास्त्र, नैतिकता, धर्म, प्रेम, त्याग और संघर्ष जैसे जीवन के विभिन्न पहलुओं का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।

उन्होंने कहा कि भगैत में बाबा धर्मराज, संत कारू खिरहरी, ज्योति पंजियार, खेदन महाराज, मीरा साहेब सहित विभिन्न लोकनायकों की गाथाएं शामिल हैं। इन गाथाओं के माध्यम से आम जनमानस को अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करने तथा सत्य, अहिंसा, प्रेम, भाईचारा और परोपकार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है।

उन्होंने कहा कि भगैत की मूल भावना इंसानियत और सामाजिक समरसता का संदेश देती है। पाठ्यक्रम में शामिल कराने की मांग

बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि लोकगाथा भगैत के संरक्षण और संवर्धन के लिए सरकारी स्तर पर पहल की मांग की जाएगी। इसके साथ ही भगैत की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्ता को देखते हुए इसे विद्यालय एवं उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल कराने की मांग सरकार से करने पर भी सहमति बनी।

हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र

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