भगैत संरक्षण के साथ बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने का संकल्प, चौघारा में हुई बैठक

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भगैत संरक्षण के साथ बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने का संकल्प, चौघारा में हुई बैठक


भगैत संरक्षण के साथ बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने का संकल्प, चौघारा में हुई बैठक


सुपौल, 11 अक्टूबर (हि.स.)। सुपौल सदर प्रखंड अंतर्गत चौघारा गांव के स्वतंत्रता सेनानी चौक परिसर में अखिल भारतीय लोकगाथा भगैत महासभा के तत्वावधान में बाबा धर्मराज महोत्सव, लोकगाथा भगैत के संरक्षण-संवर्धन और इसके ऐतिहासिक महत्व को लेकर एक आवश्यक बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता मासिक सभापति यदुनंदन यादव ने की। इसमें भगैत की समृद्ध परंपरा को संरक्षित करने के साथ-साथ इससे जुड़े परिवारों के बच्चों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया।

बैठक को संबोधित करते हुए भगैत महासभा के संयोजक सह प्रवक्ता डॉ. अमन कुमार ने कहा कि लोकगाथा भगैत संपूर्ण समाज की अमूल्य धरोहर है। यह भारतीय संस्कृति और सभ्यता का महत्वपूर्ण संरक्षक होने के साथ बिहार की सांस्कृतिक आत्मा भी है। सदियों से मौखिक परंपरा के माध्यम से भगैत की गाथाएं एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचती रही हैं। लेकिन बदलते समय में इस लोकपरंपरा को संरक्षित करने के लिए इसे व्यवस्थित रूप से लिपिबद्ध करना बेहद जरूरी हो गया है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें।

भगैत गायकों ने समाज को सत्य और न्याय का पाठ पढ़ाया। डॉ. अमन कुमार ने कहा कि भगैत गायक धर्म और लोकपरंपरा के संवाहक हैं। बाबा धर्मराज, ज्योति पंजियार, संत कारू खिरहरी और खेदन महाराज जैसी महान लोकगाथाओं के माध्यम से समाज को सदियों से सत्य, न्याय और नैतिकता का संदेश दिया जाता रहा है। इन गाथाओं ने सामाजिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में भगैत की परंपरा को बचाए रखना पूरे समाज की जिम्मेदारी है।

हालांकि, उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि जो समाज अपनी लोकगाथाओं के माध्यम से दूसरों को ज्ञान और जीवन के आदर्श सिखाता रहा है, उसी समाज के कई बच्चे आज भी उच्च शिक्षा से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि पूर्वजों ने सीमित संसाधनों के बीच भगैत की परंपरा को जीवित रखा, लेकिन वर्तमान समय में बच्चों को परंपरा के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा से जोड़ना भी आवश्यक है।

डॉ. अमन कुमार ने कहा, “अगर हमारे बच्चे सिर्फ भगैत गाते रहे और स्कूल नहीं गए, तो आने वाली पीढ़ी हमें कभी माफ नहीं करेगी। बिना शिक्षा के कला भी अधूरी है और बिना कला के शिक्षा भी सूनी है। शिक्षा इंसान की सबसे प्रिय मित्र और दुनिया का सबसे शक्तिशाली हथियार है।” उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा और डिग्री का महत्व लगातार बढ़ रहा है। पर्याप्त शैक्षणिक योग्यता और आधुनिक ज्ञान के अभाव में भगैत से जुड़े अनेक परिवारों के बच्चों के सामने रोजगार और आजीविका के सीमित विकल्प रह जाते हैं। उन्होंने इस स्थिति में बदलाव लाने की जरूरत बताते हुए कहा कि बच्चों को ऐसी शिक्षा मिलनी चाहिए, जिससे वे अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजते हुए समाज के विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ सकें।

इस अभियान के माध्यम से बच्चों और उनके अभिभावकों को शिक्षा के प्रति जागरूक किया जाएगा। साथ ही भगैत गायन और लोकसंस्कृति से जुड़े परिवारों को अपने बच्चों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान देने के लिए प्रेरित किया जाएगा। महासभा का उद्देश्य है कि भगैत परंपरा से जुड़े परिवारों के बच्चे भी शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़कर आईएएस, आईपीएस, डॉक्टर, इंजीनियर सहित विभिन्न प्रतिष्ठित क्षेत्रों में अपनी पहचान बना सकें।

बैठक में कई गणमान्य लोग रहे मौजूद

इस अवसर पर खट्टर यादव, लक्ष्मी यादव, शंभू यादव, ललित यादव, उपेन्द्र यादव, संजीव पंजियार, फुलेन्द्र यादव, महेन्द्र पासवान, छुतहरू भगत, सागर पंजियार, कुमोद यादव, राजेन्द्र यादव और बेचन राम सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। बैठक में लोकगाथा भगैत की ऐतिहासिक विरासत को बचाने, इसके प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देने और समाज के बच्चों को शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ाने के संकल्प पर चर्चा की गई।

हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र

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