भागलपुर में बाढ़ और कटाव का डबल अटैक, सबौर के इंग्लिश गांव में गंगा में समाया दो मंजिला मकान
भागलपुर, 31 अगस्त (हि.स.)। भागलपुर। जिले के सबौर प्रखंड क्षेत्र में कुदरत का कहर और प्रशासनिक बेरुखी एक साथ देखने को मिल रही है। प्रखंड की दो अलग-अलग पंचायतों में गंगा नदी ने तबाही मचा रखी है।
एक तरफ जहां फरका पंचायत के इंग्लिश गांव में भीषण कटाव के कारण कई आशियाने गंगा की गोद में समा चुके हैं, वहीं दूसरी तरफ रजंदीपुर पंचायत के संतनगर बगदेर में बाढ़ के पानी ने ग्रामीणों का जीना मुहाल कर दिया है।
दोनों ही जगहों पर प्रशासनिक मदद न मिलने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश और दहशत का माहौल है। सबौर प्रखंड की फरका पंचायत अंतर्गत इंग्लिश गांव इस समय गंगा के भीषण कटाव की चपेट में है। नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ ही कटाव ने ऐसा रौद्र रूप धारण किया है कि देखते ही देखते ग्रामीणों के पक्के मकान ताश के पत्तों की तरह ढह रहे हैं। सोमवार की सुबह ग्रामीण इतवारी साह का दो मंजिला मकान देखते ही देखते गंगा नदी में विलीन हो गया। इसके अलावा रंजीत तांती, छट्टू तांती, दीपक तांती और धनेश्वर तांती सहित दर्जनों ग्रामीणों के घर अब कटाव के मुहाने पर खड़े हैं।
कटाव की भयावहता को देखकर पूरे गांव में दहशत है। लोग आनन-फानन में अपने घरों को खाली कर सामान सुरक्षित जगहों पर ले जाने में जुटे हैं। जिनका घर नदी में समा चुका है, उनके परिवारों में चीख-पुकार मची है। एक पीड़ित महिला ने रोते हुए अपनी पीड़ा बयां की और कहा, अगर यही स्थिति रही तो बहुत जल्द पूरा गांव गंगा में समा जाएगा। सरकार और प्रशासन की ओर से अब तक कोई कटावनिरोधी कार्य शुरू नहीं कराया गया है, जिससे हमारी परेशानी और बढ़ गई है।
कटाव से इतर, सबौर के ही रजंदीपुर पंचायत के संतनगर बगदेर (वार्ड नंबर 7 एवं 8) में बाढ़ ने पिछले एक महीने से टापू जैसी स्थिति बना दी है। घनी आबादी वाले इस क्षेत्र में चारों तरफ सिर्फ पानी ही पानी नजर आ रहा है। ग्रामीण कमर से ऊपर तक भरे पानी के बीच रहने को बेबस हैं। स्थिति यह है कि रोजाना 500 रुपये की मजदूरी कमाने के लिए पुरुषों को इसी गहरे पानी को पार कर शहर जाना पड़ता है।
ग्रामीणों ने बताया कि घर में छोटे बच्चे और बुजुर्ग हैं। पानी बढ़ने के कारण अब जहरीले जीव-जंतु और सांप निकलने लगे हैं, जिससे चौबीसों घंटे किसी अनहोनी का डर सताता रहता है। बाढ़ का पानी कभी भी घरों के भीतर घुस सकता है। संतनगर बगदेर के ग्रामीणों का आरोप है कि वे पूरी तरह सरकारी सुविधाओं से वंचित हैं।
बाढ़ की विभीषिका के बीच न तो उन्हें पॉलिथीन दी गई है, न राशन और न ही आवागमन के लिए नाव की सुविधा मिली है। बीमारी की स्थिति में कोई मेडिकल टीम भी क्षेत्र में मौजूद नहीं है।
ग्रामीणों ने बताया कि करीब एक सप्ताह पहले सबौर की अंचलाधिकारी दिव्या कुमारी क्षेत्र का मुआयना करने आई थीं, लेकिन सिर्फ देखकर चली गईं। उसके बाद से न तो कोई अधिकारी आया और न ही किसी जनप्रतिनिधि ने सुध ली।
इस संबंध में पंचायत के उप मुखिया देवेंद्र कुमार ने बताया कि बाढ़ और जलजमाव से उत्पन्न इस गंभीर समस्या की लिखित व मौखिक सूचना सबौर प्रखंड के वरीय अधिकारियों को दी जा चुकी है। इसके बावजूद अब तक ब्लॉक प्रशासन ने मामले को संज्ञान में नहीं लिया है और न ही कोई राहत सामग्री भेजी है। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस कड़कड़ाती धूप और पानी के बीच जूझ रहे इन ग्रामीणों की पुकार सबौर प्रखंड के आला अधिकारियों के कानों तक कब पहुंचती है और कब पीड़ितों को राहत नसीब होती है।
हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

