बाल विवाह मुक्ति रथ ने बिहार के 9,542 गांवों में 1.77 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंचाया बाल विवाह के खिलाफ संदेश

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पटना, 08 मार्च (हि.स.)।

राज्य के 9,542 गांवों के 1.77 करोड़ से अधिक लोगों तक ‘बाल विवाह मुक्त बिहार’ का संदेश पहुंचाने वाले अपनी तरह के अनूठे अभियान ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ का अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर समापन हुआ।

इस दौरान रथ ने राज्यभर में 81,864 किलोमीटर की यात्रा की।

बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से भी अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने बाल विवाह के खात्मे के लिए भारत सरकार के 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान को मजबूती देने के लिए देशभर में 500 से अधिक ऐसे ही बाल विवाह मुक्ति रथ निकाले थे जिन्होंने देश के कोने-कोने में जाकर समुदायों को बाल विवाह के खिलाफ बने कानूनों के बारे में जागरूक और संवेदनशील बनाया।

बिहार के सभी 38 जिलों में काम कर रहे जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के 32 सहयोगी संगठनों के इस अभियान को पूरे राज्य में अभूतपूर्व समर्थन मिला। जाति, धर्म और विचारधारा के बंधन को तोड़ते हुए विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, महिला भुक्तभोगियों, नागरिक समाज संगठनों, पुलिस और धर्मगुरुओं ने एकजुट होकर बाल विवाह के खात्मे के सामूहिक संकल्प को दोहराया।

राज्यभर में एक महीने तक चली इस यात्रा के दौरान बाल विवाह मुक्ति रथ स्कूलों, ग्राम सभाओं, धार्मिक व ऐतिहासिक स्थलों तक पहुंचा व 4,664 कार्यक्रमों के माध्यम से बाल विवाह के खिलाफ संदेश पहुंचाया। इनमें रैलियां, नुक्कड़ नाटक, शपथ समारोह, सांस्कृतिक कार्यक्रम और महिला भुक्तभोगियों की कहानियां शामिल थीं।

बाल विवाह मुक्ति रथ इस दौरान 4,425 से अधिक स्कूलों व कॉलेजों एवं 2,841 धार्मिक स्थलों तक पहुंचा। अभियान में 6,86,918 छात्र-छात्राओं और शिक्षकों के साथ-साथ 4,431 धर्मगुरुओं ने भागीदारी की।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2019–21 की अवधि में बिहार में बाल विवाह की दर 40.8 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय औसत 23.3 प्रतिशत से काफी अधिक है। देश में 40 प्रतिशत से अधिक की बाल विवाह की दर वाले 60 जिलों में 22 अकेले बिहार में हैं।

अभियान की सफलता और भारत के बाल विवाह के खिलाफ दृढ़ संकल्प के बाबत जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन की सीनियर एवडाइजर (पॉलिसी) ज्योति माथुर ने कहा, “यह रथ केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि न्याय का वाहक है। यह जनसमुदाय तक कानून, संरक्षण और जवाबदेही का संदेश लेकर जाता है, ताकि सरकार की मंशा जमीन पर वास्तविक सुरक्षा में तब्दील हो सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी

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