बड़ा शिवालय पार्वती एवं दुर्गा मंदिर विवाद में धार्मिक न्यास पर्षद का हस्तक्षेप

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बड़ा शिवालय पार्वती एवं दुर्गा मंदिर विवाद में धार्मिक न्यास पर्षद का हस्तक्षेप


अररिया 26 अगस्त(हि.स.)।

फारबिसगंज शहर के प्राचीन बड़ा शिवालय पार्वती एवं दुर्गा मंदिर के सुचारू प्रबंधन, संरक्षण एवं विकास की दिशा में हस्तक्षेप करते हुए बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद, पटना ने एक महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक कदम उठाया है। पर्षद ने फारबिसगंज के प्रसिद्ध समाजसेवी एवं उद्योगपति मूलचंद गोलछा को मंदिर न्यास के सुचारू संचालन एवं प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपते हुए एक वर्ष के लिए अस्थायी न्यासधारी के रूप में मान्यता प्रदान की है।

बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद, पटना के अध्यक्ष प्रो. रणवीर नन्दन द्वारा 24 अगस्त 2026 को जारी आदेश में कहा गया है कि बड़ा शिवालय पार्वती एवं दुर्गा मंदिर एक निबंधित सार्वजनिक धार्मिक न्यास है। वर्ष 2001 में गठित न्यास समिति के निष्क्रिय एवं अप्रभावी हो जाने तथा बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 के प्रावधानों का समुचित अनुपालन नहीं होने के कारण पर्षद द्वारा पूर्व में न्यास समिति को विधि सम्मत तरीके से विघटित किया गया था।

इसके बाद मंदिर के संचालन के लिए अस्थायी न्यासधारी की नियुक्ति की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इसी क्रम में सामाजिक कार्यकर्ता एवं दुर्गा पूजा महासंघ के अध्यक्ष मूलचंद गोलछा द्वारा पर्षद को दिए गए आवेदन में मंदिर की जर्जर स्थिति एवं स्थानीय स्तर पर मंदिर के उद्धार और विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए न्यासधारी की जिम्मेदारी सौंपने का अनुरोध किया गया था।

पर्षद ने मामले पर विचार करने के बाद बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 33 के तहत मूलचंद गोलछा को एक वर्ष के लिए अस्थायी न्यासधारी के रूप में मान्यता प्रदान की है। यह जिम्मेदारी मंदिर के सुचारू प्रबंधन, राग-भोग, जीर्णोद्धार तथा धार्मिक गतिविधियों के व्यवस्थित संचालन के लिए सौंपी गई है।

पर्षद ने अपनी स्वीकृति के साथ कई महत्वपूर्ण शर्तें भी निर्धारित की हैं। इनमें मंदिर की भूमि का किसी भी प्रकार से विक्रय, रेहन या बंधक नहीं करने, न्यास की सभी आय-व्यय का विधिवत लेखा-जोखा रखने, न्यास के नाम से राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता संचालित करने तथा प्रत्येक तीन माह में बैंक खाते की अद्यतन स्थिति पर्षद के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रावधान शामिल है।

साथ ही न्यासधारी को बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 एवं उससे संबंधित उपविधियों के सभी प्रावधानों का पालन करना होगा।

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि मंदिर की सभी संपत्तियां राजस्व अभिलेखों में बड़ा शिवालय पार्वती एवं दुर्गा मंदिर, ग्राम-पोस्ट-थाना फारबिसगंज, जिला अररिया के नाम से ही दर्ज रहेंगी और किसी व्यक्ति विशेष के नाम पर नामांतरण अथवा संशोधन नहीं किया जाएगा।

मूलचंद गोलछा को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपे जाने पर चेंबर ऑफ कॉमर्स अररिया के सचिव राकेश रौशन ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि धार्मिक न्यास पर्षद का यह निर्णय एक मिल का पत्थर साबित होगी। इससे मंदिर की व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन तो होगा हीं साथ साथ समाज में एक बेहतरीन उदाहरण भी पेश होगा।

बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के इस निर्णय का स्वागत करते हुए प्रसिद्ध व्यवसाई एवं समाजसेवी बच्छराज राखेचा, मोती लाल शर्मा,सुभाष चंद्र अग्रवाल,ज्योति भगत, कांग्रेस नेता मनोज कुमार जायसवाल, ननकी यादव, टुन्ना जी,राजेश कुमार सिंह, उद्देश्य जायसवाल,संजीत कुमार जायसवाल, पूर्व मुख्य पार्षद कृष्णदेव भगत, सुधीर कुमार जायसवाल, वार्ड पार्षद प्रतिनिधि सुनील कुमार यादव, सुजीत कुमार जायसवाल उर्फ पेंटर, मुकेश कुमार जायसवाल, सनातन, कुंदन जायसवाल, तनु प्रताप, शिवम चौरसिया,तेज प्रताप उर्फ घुंघरू, आदित्य राज उर्फ नैतिक,अमित शर्मा, मोहित जायसवाल, बासु दा, राम कुमार शर्मा, श्याम कुमार शर्मा, राजेश रमण, तरुण जायसवाल आदि ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि इस फैसले से केवल मंदिर के व्यवस्थित संचालन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगी,बल्कि इससे फारबिसगंज के इस ऐतिहासिक धार्मिक स्थल के संरक्षण, जीर्णोद्धार और विकास की नई शुरुआत होने की उम्मीद भी बढ़ी है।

हिन्दुस्थान समाचार / राहुल कुमार ठाकुर

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