बाबा धर्मराज महोत्सव को मिला राजकीय दर्जा, लोक कलाकारों की वर्षों की लड़ाई हुई सफल

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बाबा धर्मराज महोत्सव को मिला राजकीय दर्जा, लोक कलाकारों की वर्षों की लड़ाई हुई सफल


सुपौल, 26 जुलाई (हि.स.)। सदर प्रखंड के चौघारा पंचायत भवन में अखिल भारतीय लोकगाथा भगैत महासभा की निर्णायक बैठक वार्षिक सभापति घीनाय यादव की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में बाबा धर्मराज महोत्सव को बिहार सरकार द्वारा राजकीय दर्जा दिए जाने पर महासभा ने हर्ष व्यक्त करते हुए सरकार के प्रति आभार प्रकट किया।

महासभा के प्रवक्ता डॉ. अमन कुमार ने कहा कि बाबा धर्मराज महोत्सव को राजकीय दर्जा मिलने से बिहार की लोक संस्कृति, लोकगाथा और सदियों पुरानी भगैत परंपरा को ऐतिहासिक सम्मान मिला है। उन्होंने कहा कि डुगडुगी की थाप और लोकगाथा के स्वर को अब नई पहचान मिली है। पीढ़ियों से गांव-गांव जाकर बाबा धर्मराज की कथा का प्रचार करने वाले हजारों लोक कलाकारों के समर्पण का यह सम्मान है।

उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय लोकगाथा भगैत महासभा पिछले 21 वर्षों से इस मांग को लेकर लगातार संघर्ष कर रही थी। इस दौरान ज्ञापन सौंपे गए, पदयात्राएं निकाली गईं और सरकार के समक्ष विभिन्न मंचों पर इस मांग को प्रमुखता से रखा गया। अब बिहार सरकार द्वारा इस मांग को स्वीकार किए जाने से लोक कलाकारों का सम्मान बढ़ा है और बिहार की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

डॉ. अमन कुमार ने कहा कि यह केवल महासभा की नहीं, बल्कि उन सभी लोक कलाकारों की जीत है जिन्होंने अपना जीवन इस परंपरा के संरक्षण और संवर्धन में समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि बाबा धर्मराज के सत्य, न्याय और लोककल्याण के संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए महासभा आगे भी निरंतर कार्य करती रहेगी।

बैठक में मुख्य महंत गजेंद्र प्रसाद यादव, उपसभापति अनंत लाल यादव, सचिव परमेश्वरी प्रसाद, लक्ष्मी यादव, रघुनंदन यादव, छुतहरू भगत, यदुनंदन यादव, खट्टर यादव, अच्छेलाल यादव, श्याम पंजियार, शिवन यादव, शंभू यादव, कृष्ण कुमार, नरेश राम, फुलेंद्र यादव सहित बड़ी संख्या में महासभा के पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र

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