यह मेरा नहीं बल्कि बिहार के लोकगीतों का सम्मान: मनीषा श्रीवास्तव

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यह मेरा नहीं बल्कि बिहार के लोकगीतों का सम्मान: मनीषा श्रीवास्तव


पटना, 11 जून (हि.स.)। सुप्रसिद्ध लोकगायिका मनीषा श्रीवास्तव को संगीत नाटक अकादमी द्वारा उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार 2025 देने की घोषणा हुई है। यह बिहार के लिए गौरव का विषय है।

इस सम्बन्ध में हिन्दुस्थान समाचार से विशेष बातचीत में मनीषा श्रीवास्तव ने कहा कि यह सम्मान सिर्फ मेरा नहीं, बल्कि बिहार की लोकगीतों, लोक संस्कृति के साथ-साथ उन तमाम कलाकारों का है, जो मेरी तरह बिहार के परम्परागत विषयों को आगे बढ़ाने के साथ साथ उसको सहेजने एवं संवारने का काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इस सम्मान को अपने बड़े बुजुर्गों, गुरुजनों, साथियों को समर्पित करती हूँ। जिन्होंने मुझे हर समय प्रोत्साहन भरे शब्दों से सराहा तथा निरंतर बेहतरीन कार्य करते रहने की प्रेरणा दी।

मनीषा श्रीवास्तव ने बताया कि उनका जीवन लोक संगीत को समर्पित है। उन्होंने अबतक भोजपुरी के अलावे मैथिली, अवधी, हिंदी एवं संस्कृत भाषाओं में गीत गाए हैं। उन्होंने कहा कि उनकी तैयारी बिहार की अन्य भाषाओं, अंगिका, बज्जिका एवं मगही की लोकगीतों को भी गाने की चल रही है। उन्होंने कहा कि दुनिया की सभी भाषाएँ मां समान हैं और उन सभी भाषाओं में अगर अच्छे लोकगीत हैं, लोक संगीत है तो उसे उसका सम्मान मिलना चाहिए।

उन्होंने बताया कि लोकगीतों के साथ साथ बिहार के सांस्कृतिक विरासत समेत धरहोरों के ऊपर काम कर रही हैं। बाबू वीर कुँवर सिंह की जीवनी गीत, डॉ० राजेन्द्र प्रसाद की जीवनी गीत, प्रधानमंत्री के मोटे अनाज को प्रोत्साहन देने के आह्वान को प्रेरित करता मिलेट्स गीत तथा बेटी बाचाओ एवं बेटी पढ़ाओ अभियान को सार्थक बनाने हेतु बेटियों के ऊपर अलग-अलग विषय को लेकर गीत गा चुकी हैं। आने वाले वर्षों में बिहार के अन्य धरोहरों पर आपको गीत सुनने को मिलेंगे।

मनीषा श्रीवास्तव ने कहा कि शुरु से अपना अलग राह बनाकर चलती रही हूँ। मैंने बाजार के अधीन खुद को नहीं किया, बल्कि बाजार में बजने वाले गीतों के समकक्ष श्लील गीतों का एक समानांतर लकीर खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि संगीत नाटक अकादमी से मिला सम्मान उन्हें नई ऊर्जा देगा।

हिन्दुस्थान समाचार / सुरभित दत्त

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