गुठनी के अवनीश ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर लहराया तिरंगा, एशियन मास्टर्स तैराकी में जीता रजत पदक
सीवान, 11 अक्टूबर (हि.स.)। सीवान जिले के गुठनी प्रखंड के मैरिटार निवासी अवनीश कुमार सिंह ने अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए सीवान और बिहार का मान बढ़ाया है।
बेंगलुरु में आयोजित दूसरी एशियन मास्टर्स स्विमिंग चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए अवनीश ने 200 मीटर व्यक्तिगत मेडले (आईएम) स्पर्धा में रजत पदक जीतकर शानदार उपलब्धि हासिल की। उनकी इस सफलता से क्षेत्र में खुशी का माहौल है। अवनीश बरपलिया पंचायत के मुखिया विंध्याचल सिंह के भतीजे और स्वर्गीय शैलेश कुमार सिंह के पुत्र हैं।
अवनीश की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है, क्योंकि इसके पीछे उनके पिता का अधूरा सपना और वर्षों की मेहनत की कहानी छिपी है। उनके पिता स्वर्गीय शैलेश कुमार सिंह स्वयं एक कुशल तैराक थे और राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में पदक जीत चुके थे। तैराकी का हुनर अवनीश को विरासत में अपने पिता से मिला। पिता की प्रेरणा और खेल के प्रति लगन को आगे बढ़ाते हुए अवनीश ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रजत पदक जीतकर उनके अधूरे सपने को पूरा किया है। अवनीश इससे पहले राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में आठ पदक हासिल कर चुके हैं। अंतर रेलवे तैराकी प्रतियोगिताओं में भी उन्होंने कई पदक जीते हैं। वर्तमान में वे मध्य रेलवे में प्रधान टिकट निरीक्षक के पद पर कार्यरत हैं। नौकरी की जिम्मेदारियों के साथ खेल के प्रति समर्पण बनाए रखना उनकी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है। एशियन मास्टर्स चैंपियनशिप में रजत पदक जीतना उनके खेल जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
अवनीश की सफलता के साथ उनके परिवार का खेलों से जुड़ाव भी चर्चा में है। विंध्याचल सिंह की पत्नी शीला देवी ने भी भारोत्तोलन में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। 75 किलोग्राम वर्ग की भारतीय महिला भारोत्तोलक के रूप में उन्होंने 2008 के जूनियर राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीता था। वर्ष 2010 में दिल्ली में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया था। इसके अलावा एशियाई जूनियर चैंपियनशिप में भी उन्होंने रजत पदक हासिल किया। बाद में वे भारोत्तोलन रेफरी बनीं और 2023 में राष्ट्रमंडल खेलों में रेफरी की भूमिका निभाई। वर्तमान में वे लखनऊ में रेलवे में कार्यरत हैं।
अवनीश की अंतरराष्ट्रीय सफलता ने एक बार फिर साबित किया है कि छोटे गांवों से निकलकर भी खिलाड़ी अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन कर सकते हैं। पिता से मिली तैराकी की विरासत को अंतरराष्ट्रीय पदक तक पहुंचाकर अवनीश ने अपने परिवार के साथ मैरिटार, गुठनी और पूरे सीवान जिले को गौरवान्वित किया है। उनकी उपलब्धि क्षेत्र के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / Amar Nath Sharma

