रुईधासा महाकाल मंदिर में मां स्कंदमाता की विधि-विधान से हुई पूजा-अर्चना

WhatsApp Channel Join Now
रुईधासा महाकाल मंदिर में मां स्कंदमाता की विधि-विधान से हुई पूजा-अर्चना


किशनगंज, 15 अक्टूबर (हि.स.)। शारदीय नवरात्र के पांचवें दिन गुरुवार को शहर के रुईधासा स्थित महाकाल मंदिर में मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की गई।

पुरोहित गुरु साकेत के सानिध्य में धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ। नवरात्र के पहले दिन से ही मंदिर में मां दुर्गा की पूजा की जा रही है। मां के दर्शन और पूजन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल में डूबा रहा। यहां मां दुर्गा के साथ महाकाल बाबा की भी नियमित पूजा-अर्चना की जाती है। संध्या में आरती का आयोजन किया जाता है, जिसमें श्रद्धालु भक्तिभाव से शामिल होते हैं।

पुरोहित गुरु साकेत ने बताया कि मां स्कंदमाता नवदुर्गा का पांचवां स्वरूप हैं। भगवान कार्तिकेय को स्कंद नाम से भी जाना जाता है। उनकी माता होने के कारण देवी को स्कंदमाता कहा जाता है। मां की गोद में भगवान स्कंद बालरूप में विराजमान रहते हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवी चार भुजाओं वाली हैं और कमल के आसन पर विराजती हैं। इसी कारण उन्हें पद्मासना भी कहा जाता है। उन्होंने बताया कि मां स्कंदमाता को ममता, प्रेम और संतान की रक्षा का प्रतीक माना जाता है। इनकी आराधना से भक्तों को सुख-शांति और संतान की उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होने की मान्यता है। संतान सुख की कामना करने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी मां की उपासना विशेष फलदायी मानी जाती है। गुरु साकेत के अनुसार, सिंह मां स्कंदमाता का वाहन है। उन्हें सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। मान्यता है कि उनके चारों ओर सूर्य के समान दिव्य तेज का मंडल दिखाई देता है।

मां की कृपा से साधक के मन और मस्तिष्क में ज्ञान का विकास होता है। उन्होंने कहा कि सच्चे मन और श्रद्धा से मां की आराधना करने वाले भक्तों पर देवी की कृपा बनी रहती है और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / धर्मेन्द्र सिंह

Livevns.news Desk
Livevns.news Desk

761624 Articles

Share this story