मधुबनी में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष महासम्मेलन प्रारंभ, जुटे देश के नामचीन विद्वान

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मधुबनी, 04 अप्रैल (हि.स.)। जिला मुख्यलय स्थित नगर भवन में शनिवार को दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष महासम्मेलन का भव्य आगाज किया गया। अवसर पर ज्योतिष शास्त्र के देश भर से आये विशिष्ट विद्वानों ने अपना मंतव्य व्यक्त किया।

कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वाविद्यालय दरभंगा के कुलपति डा लक्ष्मी निवास पांडे तिरुपति विश्वाविद्यालय के पूर्व कुलपति डा राधाकांत ठाकुर ज्योतिषाचार्य डॉ सुनील श्रीवतास्तव डा अवधेश पांडे साहित कई विशिष्ट लोगों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का प्रारंभ किया।

विशिष्ट विद्वानों की वक्ताव्य में स्पष्ट किया गया कि ज्योतिष शास्त्र प्राचीन काल व आधुनिक युग के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदन रखता है। युवा वर्गों में बेरोजगारी की समाप्ति के लिए ज्योतिष का ज्ञान, वास्तु गणना, अंकगणित ज्योतिष, औरा ज्ञान का वस्तविक शिक्षण प्रभावी सिद्ध हो सकता है। वर्तमान केंद्रीय सरकर द्वारा सनातन धर्म को स्थापित करने के लिए ढेर सरे प्रयास जरी हैं।

संस्कृत शास्त्र से सांस्कृतिक वैभव को अक्षुण्ण रखने का प्रभावशील कार्य केंद्र सरकार द्वारा जारी बताया। मधुबनी जिला में इस कार्यक्रम का आगाज 24 वर्ष के बाद हुआ है।

ज्योतिषाचार्य डा सुनील कुमार श्रीवास्तव द्वारा अपने संस्थान के तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष सनातन महासम्मेलन कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।

संयोजक डॉ सुनील श्रीवतास्तव ने बताया की कार्यक्रम में पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, कर्नाटक, तामिलनाडु आदि प्रदेशों से विशिष्ट ज्योतिषों को आमंत्रित किया गया है।

आमंत्रित इन विद्वानों का वक्तव्य प्रभावी सिद्ध होगा। कार्यक्रम की शुरुआत में पंडितों व वक्ताओं ने ज्योति शास्त्र के मूल आयाम को दर्शाते हुऎ इसकी शास्त्रीय महता पर प्रकाश डाला।

संस्कृत विश्वाविद्यालय तिरुपति के पूर्व कुलपति डा राधाकांत ठाकुर ने बताया की ज्योतिष शास्त्र की अध्ययन और उसके अनुशरण से जीवन यापन व सामान्य जीवन में किसी प्रकार की कोई भी विकार तथा समस्याओं का सरा सहज सरल निदान आज भी संभव है।

पूर्व कुलपति डा रामचन्द्र झा ने कहा कि प्राचीन काल में ज्योतिष शास्त्र की महत्ता के अनुसार ही समय काल परिस्थित की गणना की जाती थी। आज भी अक्षांश और देशांतर के मध्यम से ही पत्रिका का निर्माण किया जता है। जिसमें की कुंडली योग आज भी देखने की व्यवस्था है।

अवसर पर महिला ज्योतिषाचार्य साहित अंक ज्योतिष हस्तरेखा वीशारद वस्तुविद साहित अन्य विषयों के विख्यात विद्वानों ने अपना वक्तव्य दिया। उत्तर प्रदेश अयोध्या से पहुंचे पंडित अवधेश पांडे ने बताया की राम काव्य की परंपरा में सर्वत्र ज्योतिष शास्त्र की चर्चा का दृष्टान्त निहित है। साथ ही आधुनिक युग में ज्योतिष की ज्ञान के साथ तंत्र की साधना व वास्तविकता की ज्ञान रहने से युवक बेरोजगारी की मार से बच सकता है।

डा रामसेवक झा ने कहा कि ज्योतिष शास्त्र की गहण अध्ययन से धन प्राप्त की असीमित साधन हैं।ज्योतिष गणना व कुंडली योग निर्धारित कर पैसे की उपार्जन किए जा सकते हैं। डॉ अवधेश पांडे ने कहा की उत्तर प्रदेश के जिलों में इसकी महत्व आज भी प्रभावित देखे जा सकते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / लम्बोदर झा

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