सतत् कृषि के लिए संतुलित उर्वरक उपयोग पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

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सतत् कृषि के लिए संतुलित उर्वरक उपयोग पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित


पूर्णिया, 05 मई (हि.स.)। कृषि विज्ञान केंद्र जलालगढ़ पूर्णिया एवं जिला कृषि कार्यालय पूर्णिया के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को जलालगढ़ प्रखंड के ग्राम कठैली में एक दिवसीय सतत् एवं संतुलित उर्वरक उपयोग विषयक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम भारत सरकार के अंतर्गत कृषि अनुसंधान परिषद के निर्देश के आलोक में आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में जिला कृषि पदाधिकारी हरिद्वार प्रसाद चौरसिया, कृषि विज्ञान केंद्र के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. के.एम. सिंह, पटना से आए पौधा प्रजनन एवं आनुवंशिकी वैज्ञानिक डॉ. संतोष कुमार, सस्य वैज्ञानिक डॉ. गौस अली सहित उर्वरक कंपनियों के प्रतिनिधि एवं अन्य वैज्ञानिकगण उपस्थित रहे।

जिला कृषि पदाधिकारी ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए किसानों को मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक उपयोग, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन पद्धतियों को अपनाने, जैविक खेती को बढ़ावा देने तथा हरित खाद जैसे मूंग, ढैंचा एवं सनई के उपयोग के लिए प्रेरित किया। साथ ही फसल चक्र एवं फसल विविधीकरण अपनाने पर जोर दिया गया।

डॉ. के.एम. सिंह ने कहा कि किसानों को मृदा जांच के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए, जिससे उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ भूमि की उर्वरा शक्ति भी बनी रहे। उन्होंने नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश के साथ सूक्ष्म पोषक तत्वों के संतुलित उपयोग की आवश्यकता बताई।

वैज्ञानिकों ने असंतुलित उर्वरक उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों की जानकारी देते हुए बताया कि इससे मृदा स्वास्थ्य में गिरावट, रोग एवं कीटों का प्रकोप बढ़ता है, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है और पर्यावरण प्रदूषण भी बढ़ता है। उन्होंने यह भी बताया कि इसका असर पशुधन पर भी पड़ता है, जिससे उनके स्वास्थ्य एवं दुग्ध उत्पादन में कमी आती है।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित किसानों, जनप्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियों ने संतुलित उर्वरक उपयोग को अपनाने एवं इसके प्रति जागरूकता फैलाने की शपथ ली। ---------------

हिन्दुस्थान समाचार / नंदकिशोर सिंह

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