प्रभारी मंत्री से अधिवक्ताओं ने की नवादा में पृथक मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण की स्थापना की मांग

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प्रभारी मंत्री से अधिवक्ताओं ने की नवादा में पृथक मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण की स्थापना की मांग


नवादा, 01 जून (हि.स.)। जिला के अधिवक्ताओं ने मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) से संबंधित गंभीर समस्याओं के निराकरण हेतु सोमवार को बिहार सरकार के लघु जल संसाधन मंत्री डॉक्टर संतोष कुमार सुमन के समक्ष एक विस्तृत ज्ञापन नवादा परिसदन में प्रस्तुत किया गया।

प्रतिनिधिमंडल में व्यवहार न्यायालय नवादा के अधिवक्ता उपेन्द्र कुमार, निरंजन सिंह, अरविंद कुमार, तेजनारायण यादव, ईश्वर शर्मा कृष्ण मुरारी, अमिताभ राजीव एवं अजीत कुमार सिन्हा सहित अन्य अधिवक्ता शामिल थे। उन्होंने नवादा जिले के दावा-कर्ताओं, उनके परिजनों तथा अधिवक्ताओं को हो रही व्यावहारिक कठिनाइयों से मंत्री को अवगत कराया।

अधिवक्ताओं ने बताया कि बिहार मोटरयान दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (गठन एवं सेवा शर्तें) (संशोधन) नियमावली, 2024 लागू होने तथा 19 अप्रैल 2023 की अधिसूचना के बाद प्रमंडल स्तर पर न्यायाधिकरण गठित किए गए। इसके फलस्वरूप 1 अप्रैल 2019 के बाद के सभी लंबित मामलों को जिला स्तर से हटाकर प्रमंडलीय न्यायाधिकरणों में स्थानांतरित कर दिया गया।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि इस व्यवस्था के कारण नवादा जिले के लगभग एक हजार से अधिक मामले लंबित हो गए हैं। पहले जिला व्यवहार न्यायालय में मामलों का अपेक्षाकृत शीघ्र निस्तारण हो जाता था, जबकि वर्तमान व्यवस्था में एक-एक मामले की सुनवाई हेतु तीन से चार माह की तिथि मिल रही है। अनेक मामलों में पूरे वर्ष में केवल दो से तीन बार ही सुनवाई हो पा रही है।

अधिवक्ताओं ने यह भी बताया कि दावा-कर्ताओं एवं उनके परिजनों को प्रत्येक तिथि पर 100 से 150 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है तथा समय और श्रम की भी हानि हो रही है। कई बार केवल गवाही के लिए उपस्थित होने पर भी सुनवाई स्थगित हो जाती है। इससे अधिवक्ताओं, बीमा कंपनियों के प्रतिनिधियों तथा पक्षकारों को बार-बार लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया की प्रभावशीलता प्रभावित हो रही है।

विशेष रूप से यह चिंता व्यक्त की गई कि सड़क दुर्घटनाओं में अपने परिवार के कमाऊ सदस्य को खो चुके आश्रित पहले से ही गंभीर आर्थिक संकट में रहते हैं। ऐसे में मुआवजा प्राप्त करने में वर्षों की देरी उनकी समस्याओं को और बढ़ा रही है। वर्तमान केंद्रीकृत व्यवस्था त्वरित एवं सुलभ न्याय के उद्देश्य को विफल कर रही है।

प्रतिनिधिमंडल ने यह भी उल्लेख किया कि पटना उच्च न्यायालय ने 21 फरवरी 2025 को दिए गए निर्णय में राज्य सरकार को आवश्यकता पड़ने पर अधिक दुर्घटना-प्रभावित जिलों में नए न्यायाधिकरण स्थापित करने की अनुमति प्रदान की गई है। वर्तमान परिस्थितियाँ स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं कि नवादा जिले में पृथक मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण की स्थापना अत्यंत आवश्यक हो गई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजय कुमार सुमन

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