आस्था का अनोखा रूप: सुल्तानगंज से गुलाटी मारते हुए 105 किमी दूर बाबाधाम के लिए निकला शिवभक्त
भागलपुर, 02 नवंबर (हि.स.)। भोलेनाथ के भक्तों की अटूट आस्था और समर्पण की एक बेहद अनोखी तस्वीर भागलपुर के कच्ची कांवरिया पथ पर देखने को मिली है, जहां बांका जिले के खड़ौदा निवासी शिवभक्त मनोरंज कुमार सुल्तानगंज से गंगाजल उठाकर करीब 105 किलोमीटर दूर बाबा बैद्यनाथ धाम (देवघर) के लिए गुलाटी मारते (लुढ़कते) हुए निकले हैं।
अमूमन सावन के महीने में डाक बम, बोल बम और दंडवत यात्रा करने वाले कांवरियों की भारी भीड़ दिखती है, लेकिन भादो और कार्तिक महीने में भी भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ है। मनोरंज कुमार की यह हैरतअंगेज यात्रा इन दिनों कच्ची कांवरिया पथ पर राहगीरों और दूसरे श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण और कौतूहल का केंद्र बनी हुई है। कांवरिया मनोरंज कुमार ने बताया कि बाबा भोलेनाथ की कृपा से उनके जीवन में सब कुछ है। उन्हें इस कठिन और अनोखे तरीके से यात्रा करने की प्रेरणा असम के कामाख्या मंदिर से मिली थी।
वहां उन्होंने पहाड़ी और पथरीले रास्तों पर श्रद्धालुओं को गुलाटी मारते हुए मंदिर की ओर बढ़ते देखा था। तभी उनके मन में यह विचार आया कि जब पहाड़ों पर ऐसी कठिन यात्रा संभव है, तो देवघर जाने वाले समतल रास्तों पर ऐसा क्यों नहीं किया जा सकता। बस फिर क्या था, उन्होंने इसे बाबा के प्रति अपने संकल्प में बदल दिया। मनोरंज कुमार इस यात्रा में अकेले नहीं हैं। उनके इस कठिन संकल्प को पूरा कराने और उनका हौसला बढ़ाने के लिए 'बिहार ड्राइवर महासंघ' के सदस्य भी उनके साथ कदम-से-कदम मिलाकर चल रहे हैं। रास्ते में जो भी इस नजारे को देख रहा है, वह दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर है। कोई उनके इस कड़े संकल्प की सराहना कर रहा है, तो कोई इसे बाबा के प्रति अटूट विश्वास की पराकाष्ठा मान रहा है।
कच्ची कांवरिया पथ पर गूंजते 'हर-हर महादेव' के जयकारों के बीच मनोरंज कुमार की यह यात्रा साबित करती है कि आस्था की कोई सीमा नहीं होती और अपने आराध्य को रिझाने के लिए भक्त किसी भी हद तक जा सकते हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

