केविके परसौनी ने रेज्ड बेड तकनीकी से किया अरहर बीज का उत्पादन













मोतिहारी,25जनवरी(हि.स.)।जिले के परसौनी स्थित कृषि विज्ञान केंद्र ने रेज्ड बेड तकनीकी से बेहतरीन राजेंद्र अरहर-1 नामक बीज का उत्पादन शुरू किया है।इसकी जानकारी देते पिपराकोठी कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख व वरीय वैज्ञानिक डा.अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि भारत में विश्व के कुल क्षेत्रफल के लगभग 65% क्षेत्र में अरहर की खेती की जाती है। अरहर,चना के बाद दूसरी प्रमुख दलहनी फसल है। अरहर की खेती असिंचित एवं सिंचित दोनों दशाओं में की जाती है, लगभग 85% अरहर की खेती असिंचित खेती के रूप में की जाती है तथा केवल 15% सिंचित क्षेत्र में की जाती है। अरहर की उन्नतशील प्रजातियों की औसत उत्पादकता 10 से 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है।

उन्होने बताया कि परसौनी केंद्र के मृदा विशेषज्ञ आशीष राय की निगरानी में राजेंद्र अरहर-1 नामक उन्नत प्रजाति का बीज उत्पादन रेज्ड बेड तकनीक जिसे कुंड और नाली विधि भी कहते हैं।जो पूर्वी चंपारण जिले समेत पूरे उत्तर बिहार के किसानो के लाभदायक साबित होगा।

डा.आशीष राय ने बताया कि बदलती जलवायु के दौर में किसान भाइयों को स्थानीय जलवायु, मिट्टी एवं परिस्थितियों के आधार पर उन्नतशील प्रजाति के बीज का चुनाव करना नितांत आवश्यक होता है।क्योकी उन्नतशील प्रजाति के बीज और वैज्ञानिक शस्य क्रियाओं के प्रयोग से किसी भी फसल की अच्छी उपज प्राप्त की जा सकती हैं।

-कैसे करे रेज्ड विधि से बीज उत्पादन

इसमे प्रति हेक्टेयर बीज दर 12-15 किलोग्राम शुद्ध प्रमाणित बीज पर्याप्त है।बुवाई के 20 से 25 दिन बाद सघन पौधों को निकालकर 20-25 सेंटीमीटर की दूरी कर देनी चाहिए।अरहर की फसल को लाइन से लाइन की दूरी 45-60 सेंमी.की दूरी पर मेड़ों पर लगाया जाए तो अधिक उपज प्राप्त की जा सकती है।बुवाई सीडड्रिल के द्वारा करने से उपज अधिक मिलती है।खाद एवं बीज एक साथ उचित गहराई पर गिरते हैं।

-कब करे बुवाई

उत्तर भारत में बुवाई का उपयुक्त समय सामान्य रूप से 15 जून से 15 जुलाई के मध्य का होता है।

-कैसे करे बीज उपचार

बुवाई से पहले बीज को राइजोबियम कल्चर से उपचारित करना चाहिए। राइजोबियम कल्चर एक पैकेट,10 किलोग्राम बीज को उपचारित करने के लिए पर्याप्त है।

-खाद का प्रयोग

कंपोस्ट अथवा गोबर की सड़ी खाद 05-10 टन प्रति हेक्टेयर उपयोग में लाएं। कंपोस्ट अथवा गोबर खाद कम से कम 20 से 25 दिन पहले खेत में डालकर मिट्टी में मिला दे,रासायनिक उर्वरक नत्रजन, फास्फोरस एवं पोटाश को 20:50:40 के अनुपात में प्रति हेक्टेयर की दर से उपयोग करें।

-खरपतवार नियंत्रण

बुवाई के 1 माह के अंदर पहले निराई गुड़ाई करनी चाहिए तथा दूसरी पहली के 20 दिन बाद करना चाहिए।

-सिंचाई

वर्षा न हो अथवा कम नमी की अवस्था में एक सिंचाई फलियां बनने के समय अक्टूबर माह में करनी चाहिए।केंद्र के कीट विशेषज्ञ डा जीर विनायक के अनुसार फली भेदक कीट अरहर की मुख्य कीट है इसकी गिंडारे फलियों के अंदर घुसकर नुकसान पहुंचाती है।ऐसे में कीटनाशक का छिड़काव फसल में फूल आने से पूर्व करना चाहिए।

-कटाई

सामान्य रूप से जब पौधे की पत्तियां गिरने एवं फलियो पर भूरे रंग की पड़ने फसल की कटाई करनी चाहिए। खलिहान में 8-10 दिन तक धूप में सुखाकर गहाई करे।बीजों को अच्छी तरह सुखाकर भंडारित करना चाहिए।

-पैदावार

उन्नत उत्पादन विधियों को अपनाकर असिंचित दशा में 12 से 16 क्विंटल एवं सिंचित दशा में 20 से 25 क्विंटल अरहर की औसत उपज प्राप्त की जा सकती है।

हिन्दुस्थान समाचार/आनंद प्रकाश

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