नंदनगढ़ में दक्षिण कोरिया के 25 भिक्षुओं ने 108 बार किया साष्टांग दंडवत
बेतिया, 24 फ़रवरी (हि.स.)। बिहार के पश्चिम चंपारण ज़िला में स्थित लौरिया ऐतिहासिक नंदनगढ़ स्तूप मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय आस्था का केंद्र बन गया, जब दक्षिण कोरिया से आए 25 बौद्ध भिक्षु-भिक्षुणियों ने यहां पहुंचकर भगवान बुद्ध की विधिवत पूजा-अर्चना की। मुख्य द्वार पर पहुंचते ही सभी श्रद्धालुओं ने साष्टांग दंडवत कर स्तूप को नमन किया। इसके बाद वे करीब आधे घंटे तक ध्यानमग्न होकर बुद्ध का स्मरण करते रहे और पांच बार स्तूप की परिक्रमा की।
भिक्षुओं ने स्तूप के समक्ष बुद्ध प्रतिमा स्थापित कर लगभग दो घंटे तक लोटस सूत्र और अन्य बौद्ध ग्रंथों का पाठ किया। मंत्रोच्चार से पूरा परिसर आध्यात्मिक वातावरण में डूब गया। श्रद्धालुओं ने 108 बार साष्टांग दंडवत कर बुद्ध के प्रति अटूट श्रद्धा व्यक्त की और अहंकार त्याग का संदेश दिया। द्विभाषीय गाइड के माध्यम से मॉन्क जियोंग बवान ने बताया कि नंदनगढ़ की पावन भूमि से जुड़ना उनके लिए अविस्मरणीय क्षण है, क्योंकि मान्यता है कि भगवान बुद्ध ने यहां प्रवास किया था। यहां से दल कुशीनगर, वाराणसी और सारनाथ के लिए रवाना हो गया।
हिन्दुस्थान समाचार / अमानुल हक

