सुपौल में मिली 150 वर्ष पुरानी हस्तलिखित दुर्गा सप्तशती पांडुलिपि, संरक्षण को लेकर बढ़ी पहल
सुपौल, 19 मई (हि.स.)। जिले के कोरियापट्टी से सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी एक महत्वपूर्ण और दुर्लभ धरोहर सामने आई है। यहां करीब 150 वर्ष पुरानी हस्तलिखित श्री दुर्गा सप्तशती की पांडुलिपि प्राप्त हुई है, जिसने क्षेत्र की ऐतिहासिक और धार्मिक परंपराओं को नई पहचान दी है। यह खोज स्थानीय सांस्कृतिक इतिहास के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बताया गया कि इस दुर्लभ पांडुलिपि को संरक्षित करने और सामने लाने में श्री रविशेखर सिंह का विशेष सहयोग रहा, जबकि इसका संरक्षण श्री जवाहर मिश्रा के मार्गदर्शन में किया गया। खास बात यह है कि कोरियापट्टी दुर्गा पूजा महोत्सव में इसी हस्तलिखित श्री दुर्गा सप्तशती के पाठ की परंपरा पिछले डेढ़ सौ वर्षों से लगातार निभाई जा रही है। इस ऐतिहासिक धरोहर के सामने आने के बाद जिला प्रशासन और कला एवं संस्कृति विभाग ने पांडुलिपियों के संरक्षण को लेकर अभियान तेज कर दिया है। विभाग की ओर से जिलेभर में ‘पांडुलिपि खोज अभियान’ चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य सुपौल की प्राचीन सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित कर उसे राष्ट्रीय एवं वैश्विक पहचान दिलाना है।
प्रशासन ने जिलेवासियों से अपील की है कि यदि उनके पास या जानकारी में कोई पुरानी पांडुलिपि, ऐतिहासिक दस्तावेज या सांस्कृतिक धरोहर मौजूद हो, तो उसकी जानकारी विभाग को दें ताकि उसे सुरक्षित रखा जा सके।
अधिकारियों ने कहा कि अभियान के समापन में अब केवल कुछ ही दिन शेष हैं, इसलिए लोग आगे आकर अपनी विरासत को बचाने में सहयोग करें। जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी कार्यालय की ओर से इसके लिए संपर्क नंबर 8092281780 जारी किया गया है। विभाग ने लोगों से आह्वान किया है कि वे अपनी ऐतिहासिक धरोहरों को लुप्त होने से बचाने के इस अभियान में सहभागी बनें, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी रह सकें।
हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र

