रक्सौल-काठमांडू रेल लाइन को नेपाल के नये प्रधानमंत्री की हरी झंडी का इंतजार

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रक्सौल-काठमांडू रेल लाइन को नेपाल के नये प्रधानमंत्री की हरी झंडी का इंतजार


- दुर्गम पहाड़ियो के बीच 136 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन की डीपीआर तैयार

पूर्वी चंपारण,31 मार्च (हि.स.)। भारतीय रेल मंत्रालय की महत्वाकांक्षी परियोजना रक्सौल-काठमांडू रेल लाइन को अब नेपाल की नई सरकार की सहमति का इंतजार है। नेपाल में नई सरकार के गठन होने से इंडो-नेपाल की रेल कनेक्टिविटी काफी सुगम और सस्ता हो सकती है। रक्सौल से काठमांडू तक 136 किमी लंबी रेल लाइन पर रेल मंत्रालय का 60-70 हजार करोड़ रुपये खर्चे होंगे। जाहिर है कि रेल लाइन बन जाने से आवागमन के साथ ही व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।

रेल मंत्रालय ने इस महत्वकांक्षी परियोजना का डीपीआर तैयार कर नेपाल सरकार को बहुत पहले भेज चुका है, बस इंतजार है नेपाल सरकार के एनओसी का है। जैसे ही नेपाल की सरकार अनापत्ति प्रमाणपत्र दे देगी, रेल निर्माण की दिशा में कार्य शुरू कर दिया जायेगा। उल्लेखनीय है कि रेल मंत्रालय के अधीन कार्यरत सरकारी एजेंसी राइट्स लिमिटेड ने इस परियोजना का सर्वेक्षण कर डीपीआर तैयार किया है। रक्सौल से काठमांडू तक प्रस्तावित रेल लाइन की लंबाई लगभग 136 किलोमीटर होगी। परियोजना की प्रारंभिक लागत करीब 60 से 70 हजार करोड़ रुपये के बीच आंकी गई है। पहाड़ी इलाको को देखते हुए इस रेल लाइन में बड़ी संख्या में सुरंग और पुलों का निर्माण प्रस्तावित है।

रक्सौल के विधायक प्रमोद कुमार सिन्हा ने बताया कि इस दिशा में सांसद डाॅ. संजय जायसवाल सतत् प्रयत्नशील है। नेपाल में 2016 में तत्कालीन ओली सरकार के समय ही इस परियोजना का डीपीआर तैयार कर अनापत्ति प्रमाण पत्र के लिए रेल मंत्रालय के द्वारा भेज दिया गया है। लेकिन तत्कालीन ओली सरकार पर चीनी प्रभाव और विदेशी कुटनीति के चलते परियोजना से संबंधित एनओसी नहीं मिल पाया। हालांकि अब नेपाल में नयी सरकार बनने के बाद उम्मीद जगी है, भारत-नेपाल की कनेक्टिीविटी को जोड़ने की दिशा में जल्द ही नेपाल के नये प्रधानमंत्री एनओसी दे देंगे। 136 किलोमीटर रेल लाइन में रक्सौल से काठमांडू तक कुल 13 रेलवे स्टेशन प्रस्तावित हैं, जिसमे रक्सौल के अलावे नेपाल के वीरगंज, बगही, पिपरा, डुमरवाना, काकड़ी, चंद्रपुर, धीयाल, शिखरपुर, सिसनेरी, सथिकेल और नेपाल की राजधानी काठमांडू प्रमुख स्टेशन बनेगा।

बताते है कि इस परियोजना में 32 रेल ओवरब्रिज, 53 अंडरपास, 259 छोटे पुल तथा 41 बड़े पुलों का निर्माण प्रस्तावित है। इसके अलावा पहाड़ी क्षेत्रों को पार करने के लिए 39 छोटी-बड़ी सुरंगें भी बनाई जाएंगी। फिलहाल, रक्सौल से काठमांडू जाने के लिए बस से यात्रा में लगभग छह घंटे का समय लगता है। बस से करीब हजार रूपये किराया देकर लोग काठमांडू जाते है, लेकिन रेल सेवा शुरू होने के बाद जहां यात्रा का समय घटकर दो से ढाई घंटे में होने की संभावना है, वहीं 300 के आसपास किराया लगेगा।

वर्तमान में रक्सौल से लगभग छह किलोमीटर दूर नेपाल के पर्सा जिले में स्थित वीरगंज के खलवा सिरिसिया ड्राई पोर्ट तक मालगाड़ियां जाती है। यहां तक कोलकाता, विशाखापट्टनम, गुजरात सहित भारत विभिन्न राज्यों से मालगाड़ियां पहुंचती हैं। जिससे भारत-नेपाल के बीच व्यापारिक गतिविधियां संचालित होती हैं। अलबत्ता इस परियोजना को लागू होने से नेपाल से वर्षो से चली आ रही बेेटी-रोटी के संबंध में और मजबूती मिलेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / आनंद कुमार

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