भाकपा-माले ने मनायी शहीद तिलकामांझी की 275वीं जयन्ती

भाकपा-माले ने मनायी शहीद तिलकामांझी की 275वीं जयन्ती
भाकपा-माले ने मनायी शहीद तिलकामांझी की 275वीं जयन्ती


भागलपुर, 11 फरवरी (हि.स.)। भाकपा-माले और ऐक्टू ने रविवार को आजादी आन्दोलन के प्रथम नायक अमर शहीद तिलकामांझी की 275वीं जयन्ती मनायी। इस अवसर पर स्थानीय सुरखीकल स्थित यूनियन कार्यालय में उनकी तस्वीर पर माल्यार्पण किया गया और दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी गयी। इसके बाद सभी भाकपा-माले और ऐक्टू कार्यकर्ता मार्च करते हुए तिलकामांझी चौक पहुंचे और शहीदों के सपनों का भारत बनाओ – संविधान व लोकतंत्र की रक्षा करो, साम्प्रदायिक उन्माद-उत्पात व झूठी गारंटी नहीं, अधिकार दो – रोजी-रोटी, स्वास्थ्य, शिक्षा व सम्मान दो, शहीद तिलकामांझी अमर रहे – शहीद तिलकामांझी को लाल सलाम आदि गूंजते नारों के बीच शहीद तिलकामांझी की मूर्ति पर पुष्प अर्पित किया।

मौके पर ऐक्टू के राज्य सचिव और भाकपा-माले के नगर प्रभारी मुकेश मुक्त ने कहा कि शहीद तिलकामांझी भागलपुर प्रक्षेत्र के वास्तविक हीरो हैं। उन्होंने किसानों-मजदूरों के अधिकारों की रक्षा एवं देश की आजादी के लिए भीषण लड़ाई लड़ी। उनके नाम से जाना जाने वाले इसी तिलकामांझी चौक पर एक पेड़ से लटका कर अंग्रेजी हुकूमत ने उन्हें सिर्फ 35 वर्ष की उम्र में फांसी दे दी थी। यह अदम्य साहसी योद्धा आजादी आंदोलन के प्रथम शहीद नायक थे। ब्राह्मणवादी इतिहासकारों ने भले ही इन्हें इतिहास में पर्याप्त स्थान नहीं दिया हो लेकिन भागलपुर प्रक्षेत्र के जनमानस के दिलों में उनका बहादुराना संघर्ष आज भी जिंदा है। मेहनतकश आवाम के हक-अधिकार की प्रत्येक लड़ाई का वे प्रेरणास्रोत बने हुए हैं। वे हमेशा नागरिक अधिकारों की रक्षा की लड़ाई में जीवित रहेंगे।

हिन्दुस्थान समाचार/बिजय

/चंदा

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